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महेश योगी के आश्रम में विदेशियों की घुसपैठ

Wed, 03 Dec 2014 01:24 AM IST
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
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पूरी दुनिया में ध्यान योग में डंका बजाने वाले महर्षि महेश योगी के ऋषिकेश स्थित आश्रम में विदेशियों की घुसपैठ हो गई है। बीटल्स फैन के रूप में यह विदेशी आश्रम पर अनिधकृत रूप से कब्जा जमाए हैं, जबकि आश्रम के मेन गेट पर ताला है और यहां राजा जी पार्क प्रशासन की तरफ से टांगा गया बोर्ड आम आदमी का प्रवेश वर्जित बताता है।
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जाहिर है कि पार्कप्रशासन की मिलीभगत से विदेशी भीतर पहुंचे हैं। आश्रम के पास रेतीले रास्ते के किनारे टैंटनुमा दुकानें उन्हें चाय, खाने के साथ नशेबाजी के लिए चिलम तक मुहैया करा रही हैं।

ऋषिकेश में गंगा किनारे जिस 15 एकड़ जमीन पर यह आश्रम बना है उसे 1961 में महर्षि महेश योगी को उत्तर प्रदेश वन विभाग ने आश्रम बनाने के लिए लीज पर दिया था। 20 साल के लिए तय यह लीज 1981 में खत्म हो गई। जमीन राजा जी नेशनल पार्क को मिल गई।
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इससे पहले ही ट्रांसेडेंटल डीप मेडिटेशन टेक्निक के सहारे विदेशों में चर्चा पा चुके महर्षि महेश योगी हिंदुस्तान छोड़ नीदरलैंड को अपना ठिकाना बना चुके थे। 1998 से यह आश्रम बंद पड़ा है। केवल एक गार्ड यहां तैनात है।

किसी को भी भीतर प्रवेश न करने को लेकर मुस्तैद गार्ड की सारी सख्ती उस सुविधा शुल्क को देख काफूर हो जाती है, जब विदेशी भेंट चढ़ाते हैं।

इसी साल मई माह में पर्यटन विभाग की तरफ से एक नोट शासन को भेजा गया है, जिसमें विदेशी पर्यटकों की आमद को देखते हुए इस जगह को टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करने की बात कही गई है, लेकिन मामला राज्य सरकार से वित्तीय और प्रशासकीय मुहर समेत वन विभाग की एनओसी में फंसा है।

पहले हाई प्रोफाइल सन्यासी थे योगी

महर्षि महेश योगी को पहले हाईप्रोफाइल सन्यासी के रूप में भी जाना जाता है। ऋषिकेश में 70 के दशक में उनका लाल-सफेद रंग का निजी विमान चर्चा का विषय हुआ करता था। उनका जन्म 1912 में जबलपुर (मध्य प्रदेश) में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की।

30 के दशक में वह हिमालय में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के संपर्क में आए। उनके साथ उन्होंने उत्तरकाशी में काफी वक्त बिताया। यहीं उन्होंने ध्यान तकनीक सीखी। लेकिन उनकी मृत्यु के पश्चात 1953 में उत्तरकाशी को छोड़ ध्यान प्रशिक्षण पर फोकस कर दिया।

58 से व्याख्यानों के लिए संसार भर की यात्राओं का सिलसिला शुरू किया, जो 1992 में उनके स्थाई रूप से नीदरलैंड बस जाने तक जारी रहा। 2008 में तकरीबन 95 वर्ष की आयु में नीदरलैंड में ही आंखें मूंदने वाले वाले महर्षि की संपत्ति का आंकलन अरबों-खरबों में हुआ। अकेले यूनाइटेड स्टेट्स की उनकी संपत्ति 300 मिलियन डालर से अधिक आंकी गई।

बीटल्स आश्रम के रूप में मशहूर
महर्षि महेश योगी का आश्रम बीटल्स आश्रम के रूप में भी मशहूर है। 1968 में तीन माह यूनाइटेड स्टेट्स के इस मशहूर बैंड के सदस्यों ने यहां डेरा डाला। वह महर्षि योगी को गुरु मानते थे। और कहते हैं यही यहीं उनके आइकानिक व्हाइट एलबम का जन्म हुआ, जिसका गीत डियर प्रूडेंस आज भी संगीत प्रेमियों को लुभाता है।

स्थानीय निवासी इसे चौरासी कुटी के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि यहां योगी ने ध्यान के लिए पत्थर की 84 कुटी का निर्माण कराया था। देख-रेख न होने से यह वीरान हैं। काई और झाड़ी के पीछे कई अपना अस्तित्व छिपाए हुए हैं।
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बीटल्स ने रचा था देहरादून पर गीत

बीटल्स बैंड के प्रमुख जार्ज हैरिसन ने देहरादून पर भी एक गीत रचा था। यह अलग बात है कि ‘देहरा दून, देहरा दून-दून...’ जैसी पंक्तियों से सजा यह गीत व्हाइट एलबम में शुमार नहीं किया गया। हैरिसन की मौत को इस 29 नवंबर को 13 साल पूरे हो गए। 2001 में उनकी जान फेफड़े के कैंसर की वजह से गई।

उनकी राख को गंगा और यमुना नदियों में प्रवाहित किया गया। उनके चाहने वाले आश्रम के इर्द-गिर्द गिटार के साथ व्हाइट एलबम के मशहूर गीत ‘डियर प्रूडेंस सन इज अप, स्काई इज ब्लू, इट्स ब्यूटीफुल एंड सो आर यू’ गाते हुए सबसे ज्यादा दिखते हैं।

भेज रहीं पापा रे को बीटल्स आश्रम के फोटो
यूके वेल्स से एमा और लारिन भी बीटल्स आश्रम में ठिकाना जमाए हैं। एमा के मुताबिक उनके आने का मकसद पापा रे के अनुभवों को फिर से जीना है। वह बीटल्स के बहुत बड़े फैन थे और यहां कई बार वह भी बीटल्स की वजह से आश्रम आकर रहे। अब एमा उन्हें यहां के फोटोग्राफ भेज उनकी यादों को ताजा करने का काम कर रही हैं।

हम जो कर सकते थे, कर चुके
महर्षि महेश योगी के आश्रम को टूरिस्ट स्पाट के रूप में विकसित करने संबंधी नोट हमने भेजा है। हम यही कर सकते थे। बाकी वन विभाग के ऊपर है।
-योगेंद्र सिंह गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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