गोरखपुर चौराहा स्थित ग्रीनवुड होटल के कमरा नंबर 205 में संदिग्ध परिस्थितियों में विदेशी नागरिक की मौत हो गई। उसका सड़ा-गला शव बिस्तर पर मिला। मृतक के न्यूयार्क अमेरिका निवासी होने के कारण प्रशासन में भी खलबली मच गई। घटना का पता देर में चलने पर प्रबंधन की लापरवाही मानते हुए पुलिस ने होटल सील कर दिया।
होटल के मैनेजर अजय शर्मा ने पुलिस को बताया कि न्यूयार्क अमेरिका निवासी स्टेफन डेनियल (66) गोरखपुर चौराहा स्थित ग्रीनवुड होटल के कमरा नंबर 205 में 30 मई से रह रहे थे। पांच अगस्त की शाम के बाद वह कमरे से बाहर नहीं आए और न ही किसी कर्मी ने उनसे कोई बात की, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह जब होटल के कमरे से दुर्गंध आने लगी तो उन्होंने इसकी सूचना एलआईयू और पुलिस को दी। सूचना पर सीओ आरएस नबियाल, एसआई जोगा सिंह मौके पर पहुंचे। कमरा अंदर से बंद था। इसलिए पुलिस ने दूसरी चाबी से कमरा खोला। कमरा खोलने पर स्टेफन डेनियल का शव बेड पर सड़ी-गली हालत में मिला। पुलिस ने होटल कर्मियों से भी पूछताछ की।
एएसपी हरीश चंद्र सती ने बताया कि होटल प्रबंधन ने कागजी कार्रवाई तो पूरी की, लेकिन समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी, इस लापरवाही पर होटल को सील कर दिया गया है। विदेशी नागरिक का शव पुलिस ने पंचायतनामा भरकर सुशीला तिवारी अस्पताल के डीपफ्रिज में रखने के लिए भेजा है। एसडीएम अभिषेक रुहेला ने बताया कि विदेश मंत्रालय की कार्रवाई, निर्देश के बाद ही पोस्टमार्टम किया जाएगा।
मुंह से निकला झाग
कमरे में मिले विदेशी नागरिक स्टेफन डेनियल का शव पांच-छह दिन पुराना लग रहा था। मुंह से झाग भी निकले थे, लेकिन होटल मैनेजर ने पुलिस को बताया कि पांच अगस्त की शाम को डेनियल ने चिकन सूप मंगाया था। चिकन सूप कमरे में रखा मिला। कमरे से पुलिस को दवाइयां भी मिली हैं। होटल कर्मियों ने बताया डेनियल का इलाज चल रहा था। वह अक्सर दवाइयां खाते थे। इसलिए प्रथमदृष्टया पुलिस अस्वस्थ होने के चलते हार्टअटैक की भी आशंका जता रही है। डेनियल का शव बेड पर पड़ा था और डेनियल की पैंट पैर पर गिरी थी, जिस पर पुलिस ने आशंका जताई कि उन्हें दौरा पड़ा हो और वह पेंट नहीं पहन पाए हों।
होटल में 30 मई से ठहरे थे डेनियल
डेनियल होटल में 30 मई से रह रहे थे। उनका वीजा 26 जनवरी 2012 से 2022 तक था। वह 30 मई से पहले एक महीना नेपाल भी रहकर आए थे। होटल कर्मियों ने बताया कि वह कहते थे कि उनकी बेटी नेपाल के दूतावास में कार्यरत है। कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि वह कमरे में रहते थे। खाना भी कम ही मंगाते थे। टॉफी, चॉकलेट बांटने के कारण वह स्थानीय बच्चों में लोकप्रिय थे।