प्रशासन की लापरवाही कहें या किसी संभावित दावेदार का कारनामा, उत्तराखंड में विदेशी वोटरों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग की वोटर आईडी को अब ये पहचान पत्र के रूप में भी इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
ताजा मामला दुगड्डा ब्लाक के ग्राम पंचायत फतेहपुर का है। यहां पर 19 नेपाली मूल के व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट में चढ़ा दिए जबकि ये यहां सिर्फ मजदूरी करने के लिए ही नेपाल से आए हैं।
हाल ही में भाबर क्षेत्र के दो ग्राम पंचायतों में यूपी क्षेत्र के वन गुर्जरों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिए गए थे। जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया था। हालांकि अभी उस पर भी प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। अब यह दूसरा मामला आ चुका है, यहां तो नेपाली मूल के व्यक्तियों को ही गांव का निवासी बना दिया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक पहुंची शिकायत
फतेहपुर के पूर्व प्रधान आनंद सिंह रावत ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इसकी शिकायत की है। उन्होंने इन नेपाली व्यक्तियों के नाम हटाने और उनको वितरित वोटर आईडी जब्त करने की मांग की है।
उन्होंने बीएलओ को भी दंडित करने की मांग की है जिन्होंने नेपालियों के नाम वोटर लिस्ट में दर्ज किए हैं।
क्षेत्रीय प्रतिनिधि होते हैं लिप्त
पंचायत स्तर पर चुनाव लड़ने वाले संभावित दावेदार इस तरह के काम कर रहे हैं। पंचायत चुनावों में दो-चार वोटों के अंतर से जीत हार का फैसला हो जाता है। इसलिए बाहर के लोगों को वोटर आईडी दिलाकर उनको अपने पक्ष में कर देते हैं।
...तो गांव के प्रधान बनेंगे
ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से उनका नाम वोटरलिस्ट में दर्ज है वह चुनाव भी लड़ सकते हैं।
जिन नेपाली मजदूरों का नाम ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट में दर्ज हो चुका है वह भविष्य में यहां प्रधान का चुनाव भी लड़ेंगे।
पूर्व ग्राम प्रधान आनंद सिंह का कहना है कि इस तरह की अनियमित्ता की जांच होनी चाहिए, और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।