हर गली-मोहल्ले की छोटी से छोटी पान की दुकान पर विदेशी ब्रांड। न कोई प्रिंट रेट और न ही सरकार के नियम के हिसाब से पैकेट पर कोई वॉर्निंग। सिगरेट का यह काला धंधा दून में चरम पर है। स्टॉक में करोड़ों की अवैध सिगरेट इकट्ठा हो चुकी हैं। प्रिंट न होने की वजह से टैक्स का भी सवाल नहीं। संबंधित विभाग खामोश हैं। इस धीमे जहर की युवाओं तक सीधे सप्लाई हो रही है।
यह विदेशी ब्रांड सबसे ज्यादा चलन में
डेविड ऑफ , गुडंग गरम, एसेस लाइट्स, स्लिम्स मूड्स, जरूम ब्लैक, डनहिल स्विच, पाइन, एस और मॉन्ड ब्रांड।
यह है नियम
सिगरेट के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने और तंबाकू उत्पादों के प्रति बढ़ रहे प्रचलन को कम करने के मकसद से वर्ष 2003 में सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट एक्ट (कोटपा) लागू किया गया था। इसके तहत देश में तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए उसके पैकेट पर हिंदी व अंग्रेजी में वॉर्निंग के साथ ही उस पर कैंसर दर्शाता हुआ फोटो होना अनिवार्य है।