उनका मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में चलाए जाने वाले खोजी अभियान के लिए विशेषज्ञता और दक्षता आवश्यक है। अनुभव के बगैर कोई खोजी अभियान नहीं चलाया जा सकता। इस उद्देश्य से ही हमने एक टीम तैयार की, जो पर्वतारोहण कर सके। पुलिस के ऐसे जवान तलाशे गए, जो बचपन से ही पहाड़ी जीवन शैली के अभ्यस्त रहे हैं। शुरुआत प्रदेश की छोटी-छोटी चोटियों के आरोहण से हुई और उसके बाद मेरे नेतृत्व में एक 15 सदस्यीय दल एवरेस्ट पर गया और कामयाब हुआ।
पहाड़ पर झुक कर चलना होता है, वे विनम्रता सिखाते हैं
गुंज्याल कहते हैं कि पहाड़ पर झुककर चलना होता है। ये हमें विनम्र रहना सिखाते हैं। पहाड़ी जीवन शैली की ये अनूठी खूबी है। ये उन्हें प्रकृति से प्राप्त हुई है। ये हमें सिखाते हैं कि आप कितनी भी ऊंचाई पर चलें जाएं, वहां से एक दिन उतरना ही होगा।
एक सही और सच्चे लीडर की पहचान होती है
एवरेस्ट की चोटी को फतह करने से ज्यादा हर पर्वतारोही के लिए यात्रा अहम होती है। उपलब्धि के उन चंद पलों के लिए एक लंबी, जानलेवा और सांसें उखाड़ देने वाली यात्रा में हमारी एकजुटता, विवेक, धैर्य, सहानुभूति और साहस की हर क्षण परीक्षा होती है। वहां हमारे चोटी की ओर बढ़ते कदमों पर कोई ताली बजाने वाला नहीं होता। हमें वहां प्रकृति ही ऊर्जा और प्रेरणा देती है। जीवन और मृत्यु की महीन संक्रमण रेखा के बीच हम उसकी आज्ञा से ही चढ़ और उतर पाते हैं। पर्वतारोहण एक सही और सच्चे लीडर की पहचान कराता है। यहां लीडर हुक्म नहीं देता, बल्कि सबसे आगे बढ़कर पहला जोखिम लेता है, जो दल के बाकी सदस्यों के लिए प्रेरणा और उत्साह का काम करता है।
गुंज्याल का कहना है कि पर्वतारोहण के बाद उनका यह अनुभव है कि वहां से पर्वतारोही और बेहतर इंसान बनकर लौटता है। जीवन और मृत्यु के बीच बिताए गए पलों में वह अपने रिश्तों की अहमियत को समझता है, जो उसे अपनों के और करीब लाती है। सांसें जब आक्सीजन के लिए उखड़ती हैं, तो समझ में आता है कि ये हमारे जीवन के लिए कितनी अहम हैं। वहां हमें आत्मबोध होता है कि पहाड़ के सामने हमारा अहंकार कितना बौना है। प्रकृति के सामने हमारी कोई हैसियत नहीं।
एवरेस्ट पर चढ़ने वाली विश्व की पहली पुलिस टीम
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए यह गौरव की बात है कि विश्व में पहली पुलिस टीम है, जिसने एवरेस्ट फतह की। आज हमारे पास नौ एवरेस्टर हैं, जिनको दुरूह पहाड़ों पर चढ़ने का अनुभव प्राप्त है।
2020 में महिलाओं का दल भी जाएगा एवरेस्ट पर
गुंज्याल के मुताबिक 2020 में महिलाओं के एक दल को भी एवरेस्ट पर भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की है। एसडीआरएफ की ओर इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। टीम में ऐसी महिलाएं हैं, जो इस अभियान का हिस्सा बन सकती हैं। शुरुआत छोटी चोटियों से की जाएगी और उसके बाद सरकार के प्रस्ताव पर महिलाओं का दल एवरेस्ट के लिए जाएगा।
चार कंपनियां तैनात, तीन की तैयारी
उन्होंने बताया कि प्रदेश में एसडीआरएफ की चार कंपनियां तैनात हैं और तीन कंपनियों का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। इसमें एक विशेषज्ञ समूह, जल पुलिस, पर्वतारोही और अब एक डॉग स्क्वायड को शामिल किया गया है। डॉग स्क्वायड में अभी दो कुत्तों को ट्रेनिंग दी गई है और चार कुत्ते और शामिल हो रहे हैं। ये कुत्ते खोजी अभियान में मददगार होते हैं।