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इधर खाने को तरसे आपदा पीड़ित, उधर नदी में फेंका अन्न

Mon, 30 Dec 2013 12:47 PM IST
अमर उजाला, मदकोट/मुनस्यारी (पिथौरागढ़)
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आपदा प्रभावितों के लिए आई राहत सामग्री को आम लोगों को बांटने के बाद सड़ी-गली सामग्री को गोरी नदी में फेंकने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
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लगभग दो ट्रक सामग्री फेंकी
बंटी और नदी में फेंकी गई सामग्री लगभग दो ट्रक बताई जा रही है। मदकोट कस्बे में रविवार सुबह ही चर्चा फैली कि कस्बे में आपदा राहत सामग्री लोगों को बंट रही है। देखते ही देखते भारी संख्या में लोग राहत सामग्री लेने उमड़ पड़े।

तमाम लोगों को आटा, चावल, दाल, बिस्कुट के साथ ही कई प्रकार की सामग्री ले जाते देखा गया। इस सामग्री में से आटा आदि तमाम सामान खराब हो गया था जिसे गोरी नदी में फेंक दिया गया। गोरी में तमाम जगह आटा समेत अन्य सामान बिखरा पड़ा है।
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नेता के पास यह सामग्री डंप थी
चर्चा है कि सत्ताधारी दल के एक नेता के पास यह सामग्री डंप थी। आपदा राहत सामग्री को दबाए रखना, छह माह बाद उसे लोगों को बांटना और सड़े गले सामान को नदी में फेंकने की बात जंगल में आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई।

नदी में आटे के सौ से अधिक कट्टे, और अन्य खाद्य सामग्री फेकी गई है। इसमें से कुछ सामग्री बह गई। इस प्रकरण से साफ हो गया है कि आपदा राहत सामग्री के वितरण में किस तरह का गोलमाल हुआ है।

यह राहत सामग्री कहां से आई। यह सामग्री प्रशासन के माध्यम से बांटी जाने वाली राहत सामग्री थी या किसी राजनीतिक दल की ओर बंटने वाली या फिर किसी अन्य संगठनों द्वारा उपलब्ध कराई राहत सामग्री थी, इसका पता अभी नहीं चल पाया है।

दोषियों के खिलाफ होनी चाहिए कार्रवाई
भाकपा माले के जिला सचिव जगत मर्तोलिया ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रुद्र सिंह पंडा ने इस प्रकरण को शर्मनाक बताते हुए कहा कि प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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भाजपा के जिला उपाध्यक्ष प्रदीप रावत कहते हैं कि छह माह से राहत सामग्री दबाए बैठे कांग्रेस के लोग पंचायत चुनावों को नजदीक देख सड़ीगली राहत सामग्री बांट रहे हैं।

प्रशासन से बंटने वाली राहत सामग्री नहीं : एसडीएम
मुनस्यारी के एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला कहते हैं कि मदकोट में बंटी और नदी में फेंकी गई खाद्य सामग्री प्रशासन से बंटने वाली सामग्री नहीं है।

यह सामग्री किसी पार्टी विशेष की हो सकती है। यह किसी दुकान का खराब सामान भी हो सकता है। एसडीएम तो इस बर्बादी को जांच का विषय भी नहीं मानते।
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