संस्कृति विभाग की ओर से लागू की गई नई व्यवस्था पर उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने गहरी आपत्ति जताई है। कलाकारों को केवल अपने जनपद में ही कार्यक्रम प्रस्तुत करने तक सीमित कर दिया गया है। इसका लोक कलाकारों ने विरोध किया है।
शनिवार को परेड ग्राउंड के पास एक होटल में पत्रकारों से बात करते हुए लोक कलाकार योगेंबर पोली ने कहा, यह व्यवस्था उत्तराखंड की विविध सांस्कृतिक धरोहर के आपसी आदान-प्रदान और प्रचार-प्रसार में बाधा बन रही है। राज्य निर्माण के बाद से अब तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आवंटन और भुगतान संस्कृति निदेशालय से ही होता आया है। जिससे सभी कलाकारों को समान अवसर मिलता रहा है। वहीं, सभी कलाकरों ने संस्कृति मंत्री और संस्कृति सचिव को ज्ञापन देते हुए मांग की है कि कार्यक्रमों का आवंटन एवं भुगतान पूर्व वर्षों की भांति संस्कृति निदेशालय से ही किया जाए।
इसके अलावा दुर्घटना की स्थिति में, कलाकारों को संस्कृति विभाग के कल्याण कोष से त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। वहीं, चेतावनी दी है कि यदि कलाकारों की मांग पूरी नहीं हुई तो दो जून से सभी भूख हड़ताल शुरू करेंगे। इस दौरान मनोज बधानी, दुर्गा सागर, विनिता रावत, राजीव चौहान, मनोज भट्ट, सुरेंद्र राणा, कुंदन चौहान, कुसुम नेगी आदि मौजूद रहे।