डंपिंग जोन से चारा-पत्ती लेकर आ रही महिलाओं को रोकने और छह घंटे तक पुलिस वाहन और थाने में बिठाने के बाद चालान करने के बाद छोड़ने के मामले में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने रक्षात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को चारा-पत्ती लाने की कोई मनाही नहीं है।
महिलाओं से चारा-पत्ती छीनने के मामले में विभाग की स्थिति स्पष्ट करते हुए वन मंत्री ने कहा कि इस मामले में वन विभाग को कोई लेना-देना नहीं है। कार्रवाई में वन विभाग के कर्मचारी-अधिकारी शामिल नहीं थे। उन्होंने प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) विनोद कुमार सिंघल से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।
प्रमुख वन संरक्षक ने उन्हें बताया कि राजस्व विभाग की भूमि पर टीएचडीसी ने डंपिंग जोन बनाया है। इस भूमि पर स्थानीय ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से खेल मैदान बनाने का अनुरोध किया था। संबंधित भूमि पर एक परिवार की महिला की ओर से कब्जा किया गया है। इस जमीन को टीएचडीसी को स्टाफ क्वार्टर आदि के निर्माण के लिए पट्टे पर दे दी है।
माफी मांगे पुलिस और सीएसआईएफ
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर चारा-पत्ती छीनने के मामले में संबंधित अफसरों से माफी मांगने की मांग उठाई । मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि एक ओर तो सरकार सड़क और विकास के नाम पर हजारों पेड़ों को काटने की अनुमति दे रही, लेकिन ग्रामीणों को उनके पशुओं के चारे के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कहा कि मामले की जांच कर आरोपी अफसरों पर कार्रवाई नहीं की गई तो मंच आंदोलन करेगा। संवाद
मामले की जांच हो
संयुक्त नागरिक संगठन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। संगठन के सुनील यागी ने कहा महिलाओं से चारा-पत्ती छीन कर बदसलूकी की गई। यह घटना घस्यारी कल्याण योजना की असफलता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने घस्यारी महिलाओं के साथ हुई घटना की कार्यवाही की मांग की है। संवाद