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हिमालय में हो रहे इस बदलाव पर नहीं दिया ध्यान, तो पूरी दुनिया हो जाएगी तबाह!

Wed, 28 Jun 2017 08:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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ह‌िमालयी क्षेत्रों में हो रहे बदलाव पर अगर जल्द ही ध्यान नहीं द‌िया गया तो यह देश ही नहीं बल्क‌ि पूरी दुन‌िया को तबाह कर सकता है। इस बात पर अब वैज्ञान‌िक भी च‌िंतन करने लगे हैं।
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उनका मानना है क‌ि झरने, झील और नदियों के घटते जल स्तर पर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया है।

यूकॉस्ट के विज्ञान धाम में मंगलवार को ‘हिमालयी क्षेत्रों में वैज्ञानिकों एवं नीति निर्धारकों के बीच उपर्युक्त सामंजस्य तैयार करना है’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। 
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इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन न केवल देश बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। 
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सबको म‌िलकर करना होगा काम

जलवायु परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर सार्थक शोध होने चाहिए, ताकि इससे बचने के लिए निष्कर्ष निकल सके। कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होती कृषि पर विचार रखे।

वहीं, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने जंगलों की रक्षा के लिए पौधरोपण करने पर जोर दिया। इस दौरान प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने स्टेट एक्शन प्लान पर प्रकाश डाला और इसकी प्रतियां मुख्यमंत्री को हस्तांतरित की।

तकनीकी सत्र में जीबी पंत इंस्टीट्यूट (अल्मोड़ा) के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी ने कहा कि केंद्र सरकार की जो भी नीतियां हैं, उन्हें राज्य में लागू किया जाए, संस्थान इसके लिए तैयार है।

सेंट्रल हिमालयन इंवायरमेंट एसोसियेशन (चिया) नैनीताल के अध्यक्ष और गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने सुझाव दिया कि शहरों का व्यवस्थित विकास होना चाहिए। डॉ. डीपी डोभाल ने उत्तराखंड में ग्लेशियर झील एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर एक प्रेजेंटेशन दी।

​स्विस कॉरपोरेशन के हेड डॉ. श्रीश सिन्हा ने आईएच कैप द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का आयोजन सेंट्रल हिमालयन इंवायरमेंट एसोसियेशन (चिया) के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में डॉ. सुब्रत शर्मा, डॉ. पंकज तिवारी समेत 285 वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया।
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