अगर आपकी धमक कोतवाली में बजती है तो फिर फर्क नहीं पड़ता कि आप चाय बनाते हो या कबाड़ गीनते हों आपके स्पेशल पुलिस ऑफिसर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
भले ही आपने दर्जा आठ भी पास न किया हो, आपको उत्तराखंड पुलिस स्पेशल पुलिस ऑफीसर बनवाकर समाज में दंबगई फैलाने के लिए अधिकृत तो कर ही देगी।
हरिद्वार कांवड़ यात्रा की व्यवस्था में पुलिस का सहयोग करने के लिए बनाए जाने वाले स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) की जमात में कबाड़ी, चाय वालों को भी शुमार कर लिया गया है।
एसपीओ के सहारे आमजन पर रौब गालिब करने के लिए छुटभैया नेताओं से लेकर ठेली-खोंमचे वाले भी खुद को एसपीओ बनाए जाने की जुगत में पसीना बहा रहे हैं। वहीं कबाड़ी और चाय वालों को एसपीओ बनाए जाने से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है।
कांवड़ यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था में सहयोग देने के लिए थाना स्तर पर जिम्मेदार लोगों को स्पेशल पुलिस ऑफिसर बनाया जाता है। एसपीओ के जिम्मे पुलिस भीड़ प्रबंधन से लेकर सूचनाओं के संकलन का काम करती है।
घरों में दुबक जाते हैं एसपीओ
हालांकि, कई बार एसपीओ स्थिति बिगड़ने पर मोर्चे पर आने के बजाए घरों में दुबक जाते हैं और पुलिस को ही स्थिति से दो चार होना पड़ता है। लेकिन, खाकी के नजदीक होने और आम जन पर रौब गालिब करने के लिए पुलिस का एसपीओ बनने को ज्वालापुर थाने में आपाधापी मची है।
ज्वालापुर थाने में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने चहेते कबाड़ियों और चायवालों को भी एसपीओ के कार्ड थमा दिए। यही नहीं थाने में पैठ रखने वाले अपने-अपने लोगों को एसपीओ बनाने की जुगत में लगे हैं।
अभी तक करीब 150 लोगों को एसपीओ बनाया जा चुका है। वहीं कबाड़ी, चायवाले और कुछ छुटभैयों को एसपीओ बनाए जाने से व्यापारियों में विरोध शुरु हो गया है।
'एसपीओ जिम्मेदार लोगों को ही बनाया जाना चाहिए था। पहले ही हमने इसकी आशंका जाहिर की थी और विरोध दर्ज कराया था। दोबारा इस मसले को उठाया जाएगा।'
संजय अग्रवाल, अध्यक्ष कांवड़ सेवा शिविर समिति, ज्वालापुर।
'अलग-अलग वर्गों के साफ छवि के लोगों को ही एसपीओ बनाया गया है। अभी तक 150 एसपीओ बनाए गए हैं।'
कुलदीप सिंह असवाल, ज्वालापुर कोतवाल।