राजनीतिक गलियारों के दिग्गजों की समरभूमि होने के कारण नैनीताल लोकसभा सीट आजादी के बाद से ही मुख्य सीट में शुमार रही है।
तीन दशक तक इनके परिवार की झोली में था नैनीताल
कई बार यहां नए प्रत्याशियों ने भी जीत दर्ज की तो कई बार दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की कर्मस्थली होने के कारण आजादी से करीब तीन दशक तक सीट उनके परिवार की झोली में रही।
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वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद 1951 और 1957 में लगातार दो बार पंत के दामाद सीडी पंत ने नैनीताल सीट से जीत दर्ज की थी।
इसके बाद से 1962 से 67 और 71 में श्री पंत के पुत्र केसी पंत ने इस सीट पर जीत की हैट्रिक बनाते हुए कांग्रेस की झोली में डाला था।
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लेकिन 1977 में भारतीय लोक दल (भालोद) के भारत भूषण ने जीत दर्ज कर पंत परिवार के विजय रथ को रोक दिया था।
इसके बाद से इस रथ पर सवार हुए पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी। उन्होंने 1980 में भालोद के भारत भूषण को पराजित किया था। 1984 में तिवारी के करीबी सत्येंद्र गुड़िया ने जीत दर्ज की।
1991 में कांग्रेस को देखना पड़ा था हार का मुंह
1989 में जनता दल के डॉ. महेंद्र पाल ने नैनीताल सीट जीती। वर्ष 1991 में कांग्रेस से पीएम पद के दावेदार रहे पंडित तिवारी को इस सीट से हार का मुंह देखना पड़ा था।
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राम लहर के चलते उन्हें भाजपा के बलराज पासी ने शिकस्त दी थी, लेकिन 1998 में भाजपा की इला पंत ने बिना किसी लहर के अपनी पारिवारिक सीट पर एनडी तिवारी को शिकस्त देकर कब्जा किया।
2002 से अब तक तीन बार हुए चुनाव में नैनीताल सीट पर कांग्रेस ने विजयश्री प्राप्त की, जिसमें एक बार डॉ. महेंद्र पाल एवं दो बार केसी सिंह बाबा विजयी हुए।
नैनीताल सीट : कब कौन रहा विजयी
1951 सीडी पांडे (कांग्रेस), 1957 सीडी पांडे (कांग्रेस), 1962 केसी पंत (कांग्रेस), 1967 केसी पंत (कांग्रेस), 1971 केसी पंत (कांग्रेस जे), 1977 भारत भूषण (भालोद), 1980 एनडी तिवारी (कांग्रेस), 1984 सत्येंद्र गुड़िया (कांग्रेस), 1989 डा.महेंद्र पाल (जनता दल), 1991 बलराज पासी (भाजपा), 1996 एडी तिवारी (कांग्रेस), 1998 इला पंत (भाजपा), 1999 एनडी तिवारी (कांग्रेस), उप चुनाव 2002 डा.महेंद्र पाल (कांग्रेस), 2004 केसी बाबा (कांग्रेस), 2009 केसी बाबा (कांग्रेस)।
कभी रानीखेत और बहेड़ी भी था नैनीताल में
नैनीताल लोकसभा सीट में कभी रानीखेत और बहेड़ी का कुछ क्षेत्र भी शामिल था। बाद में रानीखेत को अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र में मर्ज कर दिया गया जबकि बहेड़ी भी यहां से हटा दिया गया।
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इसी क्रम में बीते वर्षों में रामनगर के हिस्से को भी गढ़वाल में मिला दिया गया है। वर्तमान में नैनीताल सीट में यूएस नगर की नौ और नैनीताल जिले की पांच विधानसभा शामिल हैं।