पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की डॉ. इनोनो यहोशु व डॉ. मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि फोलिस कैथेटर को बच्चे की नाक के रास्ते आहार नाल में फंसे सिक्के के नीचे तक डाला गया। इसके बाद सुई के जरिये पाइप में पानी भरकर गुब्बारे को फुलाया गया।
पाइप को धीरे- धीरे ऊपर खींचकर सिक्के के साथ बाहर निकाला गया। टीम में बाल शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ. ज्ञानेंद्र, डॉ. नताशा, एनेस्थिसिया विभागाध्यक्ष डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. सीतू चौधरी, डॉ. देविथा आदि शामिल थे।