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हाथ से निकला आपदा के जख्मों पर मरहम का मौका

Sat, 07 Nov 2015 02:44 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
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जल प्रलय से तबाह हुए क्षेत्रों के विकास का एक मौका हाथ से निकल गया। विभागों की सुस्ती ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। 7 नवंबर 2014 को पांच हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का प्रदेश शासन को मिले पावर की उम्र शुक्रवार को खत्म हो गई और प्रदेश के विभाग नोडल आफिस तक प्रस्ताव तक नहीं भेज पाए।
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आपदा प्रभावित पर्वतीय जिलों के विकास के लिए तकरीबन आठ हजार प्रस्ताव तैयार होने थे जिन्हें एक साल में विभाग तैयार नहीं कर पाए और मौका हाथ से निकल गया। जो प्रस्ताव आसानी से पास हो सकते थे, अब उनके लिए केंद्र सरकार के पास भागदौड़ करनी पड़ेगी।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पांच हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरित करने के अधिकार की अवधि एक साल और बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भी दिया था। इसके बाद प्रदेश शासन ने कई मरतबा केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी, लेकिन अधिकार अवधि नहीं बढ़ाई गई।
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आपदा क्षेत्रों में होने वाले कार्यों में होगी परेशानी

केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को एक साल के लिए अधिकार दिया था जिससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जल्दी और आसानी से पुनरुद्धार कार्य हो सकें। शुक्रवार को रात तक अधिकार अवधि बढ़ने के संबंध में इंतजार होता रहा। अब उन्हीं प्रस्तावों को संस्तुति मिल सकेगी जो समय सीमा के अंदर अपलोड कर दिए गए हैं।

प्रस्ताव बनाने में सुस्ती बरतने वाले विभागों में शिक्षा, ग्राम्य विकास, आंगनबाड़ी, पेयजल, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना आदि शामिल हैं। इन्हें स्कूल, आंगनबाड़ी, सामुदायिक केंद्र, सड़क, हेल्थ सेंटर आदि के प्रस्ताव तैयार करने थे।

प्रमुख सचिव वन एस. रामास्वामी ने कुछ दिन पहले 55 प्रस्तावों को पास कर दिया था। इसके साथ ही 1062 प्रस्ताव ऑन लाइन अपलोड किए गए थे। इनमें सैद्धांतिक स्वीकृति 204 को मिली थी। पांच प्रस्तावों को फाइनल स्वीकृति मिल गई थी। शासन के सूत्रों के मुताबिक 8 हजार प्रस्तावों को नोडल आफिस तक भेजा ही नहीं गया। इन पर विचार ही नहीं हो पाया।

योजनाओं के अपलोड प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग-675
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-237
बीआरओ और एनएच के प्रस्ताव-9
अन्य प्रस्ताव-141
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