पहाड़ से लीसा तस्करी के मामले को चंपावत के डीएफओ एके गुप्ता ने गंभीरता से लेते हुए चल्थी, बस्तिया वन चौकी में तैनात वन दरोगा समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। दोगाड़ी रेंज के रेंजर रमेश चंद्र जोशी को मामले की जांच सौंपकर सप्ताहभर में रिपोर्ट देने को कहा गया है। डीएफओ ने कहा कि जांच में विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की मिलीभगत पाए जाने पर उन्हें बर्खास्त किया जाएगा।
रविवार को पुलिस ने चेकिंग के दौरान एलपी ट्रक नंबर यूके 04सीए/1638 में लदे लीसा के 405 कनस्तर बरामद किए थे। लीसा तस्करी के इस मामले में डीएफओ ने कड़ा कदम उठाते हुए चल्थी वन चौकी में तैनात वन दरोगा शंकर राम, श्रमिक मोहन सिंह धामी, बस्तिया चौकी में तैनात वन रक्षक पूरन चंद्र गहतोड़ी, गणेश चंद्र जोशी, महेश चंद्र भट्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
डीएफओ गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच दोगाड़ी के रेंजर को सौंपी गई है। एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी की लिप्तता सामने आई तो उनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की जा सकती है। बहरहाल पहाड़ से लीसा तस्करी के इस भंडाफोड़ से वन महकमे में खासा हड़कंप मचा हुआ है।
चंपावत से भी जुड़े हैं गिरोह के तार
लीसा तस्करी के धंधे में तस्कर
गिरोह के तार लोहाघाट और चंपावत से जुड़े हैं। इस धंधे में सफेदपोशों की
लिप्तता के भी संकेत मिले हैं। डीएफओ एके गुप्ता का कहना है कि लीसा तस्करी
के धंधे में अब तक अल्मोड़ा के एक गिरोह की लिप्तता सामने आई थी, लेकिन अब
गिरोह के तार चंपावत जिले से जुड़े होने के भी संकेत मिले हैं। उन्होंने
बताया कि पकड़े गए आरोपी चालक से पूछताछ में गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण
जानकारी मिली हैं। गिरोह का पता लगाने के लिए विभाग की टीम लगाई गई है।
कोर्ट के आदेश पर आरोपी चालक भेजा गया जेल
बूम के रेंजर बीके महरा ने बताया कि बरामद लीसा, ट्रक जब्त कर आरोपी ट्रक चालक के खिलाफ वन अधिनियम की धारा 26, 41, 42, 52 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सोमवार को आरोपी चालक को कोर्ट में पेश कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया है।
गिरोहों में प्रतिस्पर्धा के चलते हुआ भंडाफोड़
सूत्रों की माने तो लीसा तस्कर गिरोहों में प्रतिस्पर्धा के चलते ही लीसा तस्करी के इस मामले का भंड़ाफोड़ हुआ है। बताया जाता है कि जिले में लीसा तस्करी के धंधे में लगे गिरोहों के बीच पिछले कुछ समय से कारोबारी प्रतिस्पर्धा चल रही है। इसी नतीजा है कि विरोधी गिरोह की सूचना पर ही पुलिस लाखों का अवैध लीसा पकड़ने में सफल हुई है।