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आज से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव, दो दिन मनाया जाएगा धनतेरस

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धनतेरस के साथ ही शनिवार (आज) से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस बार धनतेरस का पर्व दो दिन मनाया जाएगा। धातु के सामान और बर्तन खरीदने की परंपरा के चलते शहर में बर्तन और सोने-चांदी की दुकानों को खासतौर से सजाया गया है। वहीं, 27 साल बाद धनतेरस दो दिन होगी।
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हालांकि, मूल रूप से धनतेरस 23 अक्तूबर को ही रहेगी। मां लक्ष्मी की आराधना का पर्व दीपावली उल्लास से मनाने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। दिवाली पर इस बार कई अनूठे संयोगों का संगम होगा। दिवाली को लेकर शहर के बाजार रंग-बिरंगी लाइटों, फूल-मालाओं से दुल्हन की तरह सजकर तैयार हो चुके हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि 27 साल बाद दो दिन धनतेरस का पर्व मनेगा। धनतेरस 22 और 23 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इसके साथ ही धनतेरस पर धन के कारक गुरु और स्थायित्व के कारक शनि स्वयं की राशि मीन एवं मकर में गोचर हो रहे हैं। इससे पहले धनतेरस पर यह संयोग 178 वर्ष पूर्व आठ नवंबर, 1844 को बना था। बताया कि धनतेरस प्रदोष व्यापिनी तेरस के साथ उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र से सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत योग रहेगा। अमृत चंद्रमा और बृहस्पति आमने-सामने होंगे। धनतेरस पर स्वर्ण आभूषण, चांदी, हीरा, वाहन, बर्तन, भवन, भूमि, वस्त्र सहित सभी वस्तुओं की खरीदारी मंगलकारी होगी।
ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि धनतेरस के दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और देवताओं के वैद्य धनवंतरी की पूजा की जाती है। परिवार की उन्नति के लिए धनतेरस पर सोना-चांदी, धनिया, झाड़ू आदि खरीदते हैं। धनतेरस के दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाता है। जबकि कार्तिक अमावस्या को दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। इस साल दीपावली 24 अक्तूबर को है। इस दिन रात्रि के शुभ समय में माता लक्ष्मी और गणेश की विधिपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है और घर को दीपक से रोशन किया जाता है। बताया कि जब भगवान श्रीराम लंका विजय करके माता सीता के साथ अयोध्या लौटे थे, तब दीपावली मनाई गई थी। तब से यह परंपरा चली आ रही है।
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