कलयुग में जहां बच्चे मां बाप को बोझ समझते हैं वहीं बुजुर्ग मां-बाप की इच्छा पूरी करने के लिए पलवल हरियाणा के पांच भाइयों ने श्रवण कुमार बनकर सामने आए। कांवड़ यात्रा के पहले ही दिन पांचों भाई कांवड़ में मां बाप को बैठाकर पैदल 350 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए हरियाणा के लिए रवाना हो गए।
मां बाप के आज्ञाकारी बेटों की यह कांवड़ यात्रा जहां जहां से गुजरी, सबका ध्यान अनायास ही उनकी तरफ खिंचता चला गया। हरियाणा के पलवल में फूलवाड़ी गांव निवासी (75 वर्षीय) किसान चंद्रपाल और (65 साल) की रूपवती की इच्छा थी कि वे भी हरिद्वार से गंगा जल भरकर लाएं और शिवालय में चढ़ाएं, लेकिन उम्र का तकाजा होने के कारण दोनों बुजुर्ग 350 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। तब उनके पांचों बेटों ने अपना फर्ज अदा करने के लिए श्रवण कुमार की तरह तीर्थ यात्रा कराने का संकल्प लिया।