फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भ्रूण जांच के आरोप में डॉक्टर और तीन महिला समेत पांच लोग गिरफ्तार

Sun, 05 Nov 2017 08:48 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
विज्ञापन
अरोडा नर्सिंग होम में छापा मारा
विज्ञापन
हरियाणा के अंबाला से आई पीएनडीटी की टीम ने रुड़की सिविल अस्पताल के चिकित्सकों के साथ शहर के अरोडा नर्सिंग होम में छापा मारकर भ्रूण जांच के आरोप में चिकित्सक समेत पांच लोगों को पकड़ा गया है।
विज्ञापन


जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। हिरासत में लिए गए आरोपियों में नर्सिंग होम की रिसेप्शनिस्ट के अलावा एक महिला समेत दो दलाल शामिल हैं। जांच कराने आई एक अन्य महिला से भी टीम ने पूछताछ की। टीम आरोपियों को लेकर गंगनहर कोतवाली पहुंची। कोतवाली पहुंचे एएसडीएम प्रेमलाल और तहसीलदार मंजीत सिंह ने भी मामले की जानकारी ली। इसके बाद आरोपियों को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। जहां से उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

हरियाणा की पीएनडीटी टीम के सदस्य डा. विपिन भंडारी ने बताया कि अंबाला के बराडा में इस बात की गोपनीय जानकारी मिली थी कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय एजेंट रुड़की में भ्रूण की जांच के लिए सेटिंग करा रहे हैं। जिसके बाद विभाग की एक महिला सहयोगी की मदद से यह ऑपरेशन चलाया गया। स्थानीय एजेंट को जाल में फंसाया गया। जिसके बाद एजेंट अपनी एक सहयोगी दलाल के साथ रुड़की के लिए रवाना हुआ।
विज्ञापन


टीम उसका पीछा करते हुए रविवार को रुड़की आवास विकास स्थित अरोडा नर्सिंग होम पहुंची। यहां पर 30 हजार रुपये में भ्रूण जांच का सौदा हुआ। इस दौरान टीम ने सिविल अस्पताल रुड़की के चिकित्सकों से संपर्क कर उन्हें भी अपने साथ ले लिया और नर्सिंग होम पर छापा मारकर चिकित्सक डा. एनडी अरोरा को हिरासत में ले लिया। छापे के दौरान नर्सिंग होम में भ्रूण जांच कराने के लिए पहुंची हरियाणा की एक अन्य महिला भी मिली। इसके बाद टीम ने इस महिला के अलावा एक महिला समेत दो दलालों को भी हिरासत में ले लिया। इस दौरान टीम ने रिसेप्शनिस्ट से 9000 रुपये, काउंटर से 13500 रुपये तथा एक अन्य महिला से 1500 रुपये भी बरामद किए हैं।

टीम पांचों आरोपियों को कोतवाली गंगनहर ले आई। यहां पहुंचे एएसडीएम प्रेमलाल और तहसीलदार मंजीत सिंह ने पूरे मामले की जानकारी ली। यहां से टीम ने आरोपियों को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल के समक्ष पेश किया गया। कानूनी पेंच के कारण लंबी पूछताछ के बाद फिलहाल आरोपियों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। एसीएमओ अशोक कुमार ने बताया कि यह मामला सीधे पुलिस में दर्ज नहीं कराया जा सकता है। जेएम कोर्ट के आदेश के अनुसार आरोपियों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके बाद जेएम के आदेश पर न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा। वहीं एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि पुलिस से जो भी मदद मांगी जाएगी वह उपलब्ध कराई जाएगी।

पीछा करने को दलालों की गाड़ी में लगाया था जीपीआरएस
पीएनडीटी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से भ्रूण जांच कर समाज में लिंगभेद का जहर घोल रहे चिकित्सक को अपनी गिरफ्त में लिया। अंबाला के बराडा से चली दलाल की गाड़ी का बिना चूक के पीछा किए जाने के मकसद से टीम ने उसमें जीपीएस सिस्टम लगाया था। ताकि दलालों की गाड़ी कहीं रास्ते में ओझल भी हो जाए तो जीपीआरएस मददगार बन सके। हुआ भी यही एनडीपीटी की टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से रुड़की के पुलिस प्रशासन और अस्पताल के अधिकारियों को भी विश्वास में लिया और सटीक समय पर छापेमारी कर इस गोरखधंधे का पर्दाफाश कर दिया। 

कानून की नजर में पीएनडीटी एक्ट
प्री-नेटल डायग्रोस्टिक टेक्निक यानी पीएनडीटी एक्ट 1994 के तहत देश में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए पारित कानून है। इस अधिनियम के तहत पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी हैं। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले चिकित्सक, लैब कर्मी को तीन से पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें