चार प्रजातियों के लिए नमूने
शोध के लिए गंगा नदी में मिलने वाली मछलियों की चार प्रमुख प्रजातियों गारा, लेबियो, टोर और स्कीजोथोरेक्स के पेट के नमूने लिए गए। इनके पेट में पॉलीमर, माइक्रो प्लास्टिक, कपड़ों के रेशे के अवशेष मिले। पूर्व में गढ़वाल विवि के हिमालयी जलीय विविधता विभाग ने अलकनंदा नदी में जलीय प्रदूषण पर शोध किया था। जिसमें यह स्पष्ट हुआ था कि मछलियां प्रदूषित जल और सामग्री को भोजन के रूप में निगल रही हैं।
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शोध में मछलियों के पेट में हानिकारक माइक्रो प्लास्टिक, कपड़ों के रेशे, थर्माकोल आदि के अवशेष मिले हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार की मछलियों में यह समस्या अधिक है। दूसरे चरण के शोध में यह पता लगाया जाएगा कि इस प्लास्टिक से मछलियों को कितना नुकसान हो रहा है। इन मछलियों को खाने से मानव को कितना नुकसान होगा। - डाॅ. जसपाल सिंह चौहान, विभागाध्यक्ष, हिमालयी जलीय जैव विविधता विभाग, गढ़वाल विवि