बांध बनने से पूर्व इस क्षेत्र की नदियों में स्नो ट्राउट, गार्रा, क्रोसोचिलस, ग्लिप्टोथौरेक्स, चीडो कैनिस सहित कई मछलियां नदी के तेज बहाव के साथ अभ्यस्त थी और नदी के तल पर पत्थरों के मध्य स्थित शैवाल और सूक्ष्म जलीय कीटों को खाकर जीवित रहती थी, लेकिन झील बनने के बाद यह स्थान समाप्त हो गए हैं।
इस कारण मछलियों का प्रजनन और भोजन स्थान विलुप्त हो गए हैं। वहीं टिहरी बांध बनने के बाद झील में विदेशी कामन कार्प प्रजाति की मछलियों की तादाद बढ़ रही है। प्रो.अग्रवाल ने कहा कि टिहरी झील में महाशीर प्रजाति के पिंजरा संवर्धन तकनीक द्वारा महाशीर संपदा के विकास की भी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि वह 2010 से इस पर शोध कर रहे हैं। बताया कि इस शोध में उनके साथ दो शोधार्थियों ने सहयोग किया।