फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा से गायब हैं मछलियों की 50 नस्लें

Mon, 24 Mar 2014 01:31 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगा नदी से मछलियों की कई प्रजातियां गायब हो रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी इलाकों में पानी के साथ आने वाली मछलियों की कई प्रजातियां ढूंढे नहीं मिल रही।
विज्ञापन


पढ़ें, 'भगत सिंह कोश्यारी पर भारी पड़ेंगे एनडी तिवारी'

नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड ने सर्वे कराया तो 50 प्रजातियां नहीं मिलीं। बोर्ड इन प्रजातियों को बचाने के लिए ‘सेफ जोन’ तैयार कर रहा है।

मछलियों की प्रजातियों पर संकट के मद्देनजर नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड ने पर्वतीय क्षेत्रों में बने बांधों की जांच करनी शुरू की है।

पढ़ें, हिमालय में है औषधीय पौधों की भरमार

हैदराबाद से उत्तराखंड के दौरे पर आईं बोर्ड की कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) डॉ. मधुमिता मुखर्जी ने बताया कि बांधों की सीमेंटेड दीवारें होती हैं। इस पर काई जम जाती है। इससे मीथैन गैस निकलती है जो विभिन्न मछलियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।

डॉ. मुखर्जी ने बताया कि बांधों से नदी का चेहरा बदल जाता है। बहाव न होने से पानी फ्रेश नहीं रहता। साथ ही कीटनाशक नदी के पानी में घुल रहे हैं।

पढ़ें, ...तो क्या पीडीएफ लगाएगी कांग्रेस की नैया पार

इससे रीठा, बागड़, हील समेत छोटी मछलियों की 50 प्रजातियां गायब हो गई हैं। मछलियों की प्रजातियों को बचाने के लिए बोर्ड ब्रूड बैंक बना रहा है। इससे मछलियां सुरक्षित प्रजनन कर सकेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की गंगा नहरों में केज सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसमें मछलियां खास दायरे में सुरक्षित रहेंगी।

पढ़ें, मंडप में दुल्हन ने किया सुहाग का कत्ल!

बताया कि विभिन्न प्रकार की मछलियों की पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका होती है। साथ ही इनसे अलग-अलग दवाएं भी बनती हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें