मनोज केश्वर ने बताया कि सदियों पूर्व गंगा की मुंडमाल परिक्रमा की परंपरा थी, जो अब लुप्त हो चुकी है। करीब एक हजार साल बाद अब अतुल्य गंगा के तहत इस परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए इस बार मुंडमाल गंगा परिक्रमा करने का निर्णय लिया गया है।
आगामी 16 दिसंबर को यह परिक्रमा पदयात्रा प्रयागराज से शुरू होगी। गंगा के बाएं छोर से चलते हुए पदयात्रा गंगा सागर पहुंचेगी औरा वहां से नदी के दाहिने छोर से वापस गंगा के उद्गम गोमुख तक जाएगी। गोमुख से पुन: गंगा के बाएं छोर से चलते हुए 15 अगस्त 2021 को प्रयागराज में संपन्न होगी। इस तरह धार्मिक परंपराओं के अनुसार गंगा की क्लॉक वाइज परिक्रमा की जाएगी।
पदयात्रा के दौरान गंगा के तट पर स्थित तमाम नगर, कस्बों एवं गांवों में लोगों के साथ संवाद किया जाएगा। साथ ही गंगा में प्रदूषण के कारकों को चिन्हित कर इससे बचाव के प्रति लोगों को जागरुक भी किया जाएगा।
साथ ही गंगा के तटवर्ती हिस्सों में वृहद् पौधरोपण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पदयात्रा संपन्न होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी। ताकि गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस प्रयास किए जा सकें।
अतुल्य गंगा के तहत मुंडमाल गंगा परिक्रमा पदयात्रा में कुल 5100 किमी. की दूरी पैदल तय की जाएगी। कर्नल (सेनि) आरपी पांडे, हीरेन पटेल, ले.जनरल (सेनि) एसए क्रूज, शगुन त्यागी, रोहित कुमार, रोहित उमराव तथा इंदू यह पूरी पदयात्रा करेंगे।
जबकि मार्ग में करीब बीस हजार लोग इनके साथ पदयात्रा के छोटे छोटे हिस्सों में शामिल होंगे। यह पदयात्रा अप्रैल 2021 के अंत में उत्तराखंड में प्रवेश करेगी। यहां नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और स्नो स्पाइडर ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एजेंसी द्वारा इस परिक्रमा पदयात्रा का सहयोग किया जाएगा।