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दून में दुनिया का पहला हेरिटेज मैनेजमेंट सेंटर

Sun, 05 Jan 2014 10:59 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
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विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों वाले देहरादून की पहचान अब अनुसंधान संस्थानों के लिहाज से वैश्विक होने वाली है।
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यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) दून में दुनिया का पहला प्राकृतिक धरोहर प्रबंधन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने जा रहा है।

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सेंटर ऑफ वर्ल्ड नेचुरल हेरिटेज मैनेजमेंट ट्रेनिंग नाम से शुरू होने वाले इस केंद्र में भारत समेत विश्वभर की प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए जरूरी अनुसंधान और प्रबंधकीय कार्य किए जाएंगे।
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चंद्रबनी स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान के उल्लेखनीय अनुसंधानों को देखते हुए यूनेस्को ने यह निर्णय किया है। उम्मीद जताई कि अप्रैल 2014 में सेंटर का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा।

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डॉ. माथुर ने बताया कि यहां से एशिया पैसिफिक के 52 देशों की प्राकृतिक धरोहरों के प्रबंधन की कार्ययोजना बनाई जा सकेगी। संबंधित देशों को इन अनुसंधानों के आधार पर जरूरी सुझाव दिए जाएंगे।

ये हैं भारत की प्राकृतिक धरोहर
काजीरंगा, मानस नेशनल पार्क (असम), सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), केवला (राजस्थान), नंदा देवी और फूलों की घाटी (उत्तराखंड), वेस्टर्न घाट (महाराष्ट्र, कनार्टक, तमिलनाडु और केरल को मिलाकर)
(नोट : यूनेस्को की ओर से इन्हें विश्व की प्राकृतिक धरोहर घोषित किया गया है)

यह होगा लाभ
सेंटर से भारत की सात प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्द्धन में तो मदद मिलेगी ही, इससे जुड़ने वाले देशों के छात्र भी दून आकर प्राकृतिक धरोहनों का प्रबंधन सीख सकेंगे।

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यूनेस्को ने जिन स्थानों को धरोहर घोषित किया है, वहां के वन्यजीवों, पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण के तौर-तरीके भी इस केंद्र के माध्यम से सीखे जा सकेंगे।
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इस तरह चलेगा सेंटर
यूनेस्को की ओर से सेंटर के संचालन में तकनीकी सहयोग किया जाएगा। केेंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से हर साल बजट दिया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक भी यहां सहयोग करेंगे।
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