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राज्यपाल के अभिभाषण के बहाने सरकार ने चमकाई उपलब्धियां

Thu, 10 Mar 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

राज्यपाल का अभिभाषण ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ - भाजपा।
राज्यपाल के 35 पेज के अ‌भिभाषण केवल सरकार की उपलिब्धयां।
रोजगार के सवाल को सरकारी नौकरियों में अवसर बढ़ाने तक सीमित।
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राज्यपाल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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विधानसभा सत्र के पहले दिन राज्यपाल के बजट अभिभाषण के बहाने सरकार ने अपनी उपलब्धियों तो खूब गिनाई पर भविष्य की योजनाओं का स्पष्ट खाका पेश नहीं किया।
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पलायन, रोजगार जैसी मूल समस्याओं का जिक्र भी हल्के-फुल्के अंदाज में किया गया। खास बात यह भी रही कि लगातार संसाधनों की कमी का जिक्र कर रही सरकार ने अपने स्तर से संसाधन बढ़ाने को भी तवज्जो नहीं दी।

रोजगार को सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के हाल पर छोड़ दिया गया। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के विस्तार का भी कोई स्पष्ट खाका नहीं खींचा गया।

35 पेज के राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश सरकार ने एक के बाद जारी योजनाओं का ब्यौरा पेश किया। अभिभाषण में कई उपलब्धियां गिनाई गईं। 

अवस्थापना विकास प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। सड़क, पुल, रोपवे आदि के विकास की बात सरकार ने की पर यह स्पष्ट नहीं किया कि इन क्षेत्रों को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है। 
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कृषि पर जोर दिया गया पर कृषि की मूल समस्याओं को लेकर भी कोई खाका नहीं खींचा गया। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान तेजी से कम हो रहा है। पिछले कुछ समय में प्राथमिक क्षेत्र की स्थिति में सुधार में सरकार को सफलता भी मिली है। 

समस्याएं तो बताई लेकिन समाधान नहीं:
इतना होने पर भी रोजगार के लिए सरकार ने 30 हजार नई नियुक्तियों पर ज्यादा भरोसा किया है। ग्राम्य विकास के जरिये रोजागार को बढ़ावा देने, उद्योगों को रोप इन करने का भी कोई खाका पेश नहीं किया गया।

पलायन की समस्या को अभिभाषण में उठाया गया, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए कोई अलग से रोड मैप पेश नहीं किया गया।

अभिभाषण में इस बात का जिक्र तो किया गया कि 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के कारण राज्य को 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया कि राज्य अपने संसाधन किस तरह से बढ़ायेगा।

नो टैक्स बजट:
मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही कह चुके हैं कि इस बार नो टैक्स बजट रहेगा। वेट से प्रदेश सरकार को इस समय 10 प्रतिशत वृद्धि ही मिल रही है। खनन से प्रदेश सरकार को खासी उम्मीद है पर इसमे पर्यावरण का पेंच फंसा हुआ है। 

सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने का जिक्र कर सरकार ने बड़े कर्मचारी वर्ग को साधन की कोशिश की है। लेकिन, इसमें भी सह स्पष्ट नहीं किया गया कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने पर बढ़े हुए खर्च की भरपाई किस तरह से सरकार करेगी।

बोले राज्यपाल, सरकार किसानों की हितैषी

बजट सत्र - फोटो : amar ujala
अभिभाषण के दौरान कृषि विकास कार्यक्रमों, योजनाओं का किया उल्लेख विधानसभा सत्र के पहले दिन बजट अभिभाषण के दौरान राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने कृषि विकास पर खासा जोर दिया।

सरकार को किसानों की हितैषी बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसानों की आर्थिकी को सुधारने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 

राज्य के पर्वतीय इलाकों के किसानों को कृषि यंत्रों पर 90 प्रतिशत अनुदान देने का जिक्र करते हुए कहा कि खेतीबाड़ी को बढ़ावा देने के लिए मॉडीफाइड राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम, बागवानी मिशन, सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण मिशन, जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा सरकार फल पौध रोपण योजना, मशरूम उत्पादन, उद्यान वितरण, मौनपालन, फसल बीमा योजना, बोरवेल विकास योजना, मुख्यमंत्री संरक्षित योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 

राज्य में जड़ी बूटी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए चार क्लस्टर स्थापित किए गए हैं। सरकार जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के लिए प्रत्येक जिले में जैव प्रौद्योगिकी विकास केंद्र खोलने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। गन्ना मूल्य घोषित करने के अतिरिक्त किसानों को प्रशिक्षण, बीज एवं उर्वरक मुहैया कराए जा रहे हैं
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राज्यपाल का अभिभाषण ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ - भाजपा

बजट सत्र - फोटो : amar ujala
विधानसभा सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विपक्षी दल भाजपा आक्रामक मूड में आ गई है। पार्टी प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा है कि राज्यपाल का अभिभाषण न सिर्फ झूठ का पुलिंदा है वरन राज्य के लोगों के साथ इमोशनल ब्लैकमेलिंग भी है। 

अभिभाषण सरकार का नीतिगत दस्तावेज होता है जो पूरी तरह दिशाहीन है। पिछले अभिभाषण में किए गए वादों से सरकार ने पल्ला झाड़ लिया। 

सरकार और मुख्यमंत्री ने अपने प्रचार प्रसार के लिए जिन योजनाओंकी घोषणा की वे ही मुसीबत का सबब बन गई हैं। मसलन सरकार की ओर से स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की गई। 

लेकिन योजना में बजट नहीं होने से लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कमोवेश यही स्थिति सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की है। हालत यह है कि पेंशनरों को पेंशन तक नही मिल पा रहा है। 

केंद्र पोषित योजनाओं को भी सरकार अपना नाम देकर लाज बचाने का काम कर रही है। सरकार चाहे कुछ भी कर ले, राज्य की जनता सब कुछ समझ चुकी है। 
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