गांव और शहर में बहुत फर्क होता है। इसीलिए पिंडरघाटी के अति दुर्गम सोराग गांव में आजादी के बाद पहला इंटर कॉलेज खुलने जा रहा है।
इंटर कक्षाएं राजकीय हाईस्कृल के ही भवन में चलेंगी। सरकार शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कर पाई है, मगर सोराग के लोगों के लिए ये दर्जा ऐसा वरदान है।
जिसके संचालन के लिए अभिभावक खुद के खर्चे पर तीन शिक्षक रखने को तैयार हैं। ताकि बच्चों को हाईस्कूल के बाद इंटर की पढ़ाई के लिए सोराग से 13 किमी दूर जीआईसी बदियाकोट न जाना पड़े।
26 किमी पैदल चलकर बच्चे जाते हैं पढ़ने
राजकीय हाईस्कूल में इस समय छात्रसंख्या 180 है। पहले यह स्कूल 6 से 8 तक था और 2003 से 9 और 10 की कक्षाएं शुरू हुई थी।
एक प्राथमिक विद्यालय भी गांव में है। सोराग पिंडर घाटी के अंतिम गांवों में से एक है। गांव से बदियाकोट की एकतरफा दूरी 13 किमी है।
रोजाना बच्चे 26 किमी पैदल चलकर इंटर की पढ़ाई थे। जो घर से संपन्न हैं वो बच्चे पढ़ने के लिए 37 किलोमीटर दूर कपकोट जाकर किराए में रहते हैं।
इस बार सरकार ने राजकीय हाईस्कूल का उच्चीकरण तो किया लेकिन शिक्षकों की कोई व्यवस्था नहीं हुई।
इसी सत्र से शुरु होंगी 11वीं की कक्षाएं
राजकीय हाईस्कूल में केवल तीन अध्यापक पढ़ाते हैं। इसीलिए शनिवार को अभिभावकों की बैठक में यह तय किया गया कि बच्चों को इंटर की शिक्षा देने के लिए तीन शिक्षक रखे जाएंगे।
इसके लिए विद्यालय विकास समिति का भी गठन किया गया। तय हुआ कि इसी सत्र से 11वीं की कक्षाएं शुरू करवाई जाएंगी।
सोराग में ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों की बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व शिक्षक दीवान सिंह दानू ने की।
सरकारी शिक्षकों की व्यवस्था न होने के बावजूद अभिभावक इतने खुश थे कि सभी ने पहली बार इंटर कॉलेज खुलने पर खुशी जताई और विधायक ललित फर्स्वाण के साथ मुख्यमंत्री हरीश रावत का अभार जताया।