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तो क्या वास्तु के सहारे बुलंद होंगे कांग्रेस के सितारे?

Sun, 13 Jul 2014 04:51 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में नई जमीन तलाश रही कांग्रेस अब वास्तु के सहारे सियासत चमकाने की जुगत में जुट गई है। इसी के तहत नए प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने प्रदेश मुख्यालय में वास्तु के हिसाब से फेरबदल शुरू की है।
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इस फेरबदल में सालों से अपने-अपने कमरों में जमे दिग्गज नेताओं को भी इधर से उधर जाना पड़ेगा। वास्तु दोष दूर करने केलिए अध्यक्ष अपना भी कमरा बदल रहे हैं।

हालांकि आधिकारिक तौर पर तर्क दिया जा रहा है कि अध्यक्ष का कमरा छोटा था इसलिए वह दूसरे रूम में शिफ्ट हो रहे हैं।
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विधानसभा उपचुनाव में जुटे कांग्रेस के बड़े नेता

इन दिनों जहां कांग्रेस के बड़े नेता एकता के नारे के साथ विधानसभा उपचुनाव में जुटे हैं वहीं प्रदेश कार्यालय का कायाकल्प हो रहा है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद हरीश रावत का जब प्रदेश कार्यालय में आना जाना बढ़ा तो पूर्व अध्यक्ष यशपाल आर्य ने वहां की रंगाई-पुताई कराई थी।

इन दिनों कांग्रेस कार्यालय के सभी कमरे खाली करा दिए गए हैं। कमरों के बाहर लगी पदाधिकारियों की नेमप्लेट भी हटा दी गई है। इस पर कुछ पदाधिकारियों ने आपत्ति भी जताई है।

यशपाल आर्य ने पूरे आठ साल इसी कक्ष में बिताये

दरअसल अभी तक जितने भी अध्यक्ष हुए हैं सभी कार्यालय की दाहिनी तरफ बने ब्लाक में बैठे रहे थे। उसी ब्लाक में प्रदेश अध्यक्ष का कमरा, निजी और पीसीसी कर्मचारियों का भी कक्ष है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने पूरे आठ साल इसी कक्ष में बिताये और कांग्रेस को कई चुनावों में जीत भी दिलाई। बतौर कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत ने इस ब्लाक का निर्माण कराया था और वह भी सात साल यहीं पर बैठे।

अब नए अध्यक्ष ने अपना कक्ष कार्यालय के बिल्कुल बांयी तरफ चुना है। इस ओर के कमरों में अभी तक आईटी डिपार्टमेंट और प्रदेश महामंत्री व उपाध्यक्ष बैठ रहे थे।
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कमरों के लिए छिड़ेगा संग्राम

महामंत्री विजय सारस्वत जहां बैठते थे वह अध्यक्ष का वेटिंग रूम हो गया है। उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कमरा पीसीसी कर्मचारियों को सौंप दिया गया है।

अब केदार सिंह रावत, संतोष कश्यप और शंकर चंद्र रमोला के कमरे का इस्तेमाल अध्यक्ष करेंगे। जबकि आईटी डिपार्टमेंट अध्यक्ष का निजी कक्ष होगा।

उपचुनाव के बाद हो सकता है कि कांग्रेस को प्रदेश में नई जमीन मिल जाए लेकिन यह भी तय है कि चुनाव मैदान से योद्घा लौटेंगे तो कमरों के लिए संग्राम छिड़ेगा।
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