प्रदेश में जंगलों की आग बेकाबू होती जा रही है। स्थिति नियंत्रण में न आते देख अब नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) और सेना को आग बुझाने के लिए लगाया गया है। अल्मोड़ा, गौचर और पौड़ी में एनडीआरएफ, नैनीताल में एसडीआरएफ ने मोर्चा संभाल लिया है।
रुद्रप्रयाग में जंगलों की आग बुझाने के लिए सेना के जवानों को लगाया गया। उधर कुमाऊं में रामगढ़ ब्लाक के बोहराकोट गांव में देर रात में जंगल की आग बुझाते वक्त पहाड़ी से गिरकर एक व्यक्ति की मौत की मौत हो गई। गढ़वाल मंडल में अब तक 517 और कुमाऊं में 260 घटनाएं जंगल में आग लगने की सामने आ चुकी हैं।
गढ़वाल के तमाम हिस्सों में शुक्रवार को भी जंगल आग से धधकते रहे। टिहरी जिले के आराकोट के जंगलों की आग की लपटें सड़क पर पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई। इससे चंबा-ऋषिकेश हाईवे पर कुछ देर तक यातायात बाधित रहा। वन विभाग के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो गढ़वाल मंडल में आग की चपेट में आने से अब तक 890.38 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा जलकर राख हो चुकी है। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों के वास स्थल आग की भेंट चढ़ चुके हैं।
रुद्रप्रयाग में भड़की आग पर सेना ने पाया काबू
उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं।
- फोटो : amar ujala
रुद्रप्रयाग जिले में शुक्रवार सुबह नौ बजे मुख्य बाजार से करीब पांच किमी दूर ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर तिलणी में सिविल वन क्षेत्र में आग भड़क उठी। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन आग के विकराल होने से उस पर काबू पाना मुश्किल था। वन विभाग को सेना की मदद लेनी पड़ी। 6-कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने मौके पर पहुंचकर तीन घंटे में आग बुझाई।
यह दल तूना-बौंठा मार्ग पर भी पहुंचा, जहां तेजी से बस्ती क्षेत्र की तरफ बढ़ रही वनाग्नि पर कड़ी मशक्कत के बाद सेना और वन कर्मियों ने काबू पाया। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के खांकरा, अगस्त्यमुनि, उत्तरी और पूर्वी जखोली रेंज में चीड़ के जंगल होने से अब भी भीषण आग भड़की हुई है।
इधर, कुमाऊं रेजीमेंट के कमांडेट राजीव नयन सिंह का कहना है कि उनके स्तर से वनाग्नि पर काबू पाने के लिए वह हर संभव मदद करेंगे। रुद्रप्रयाग के धनपुर पट्टी के खैड़ी गांव में जलता हुआ चीड़ का पेड़ एक आवासीय मकान के ऊपर आ गिरा।
लैंसडौन और कालागढ़ वन प्रभागों में लगी आग को बुझाने के लिए पुलिस, पीआरडी जवान और फायर बिग्रेड ने कमान संभाल ली है। उधर हरिद्वार जिले में राजाजी नेशनल पार्क और हरिद्वार वन प्रभाग के जंगल भी दवानल की चपेट में हैं। जंगलों में आग लगने से जहां लाखों की वन संपदा राख होने की आशंका है। मनसा देवी पहाड़ी के जंगलों में भी आग लग गई जो मोतीचूर से लेकर बेरीवाड़ा तक के जंगल तक फैल गई है।
राज्यपाल ने वनाग्नि पर जताई चिंता
गवर्नर केके पॉल
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राज्यपाल डॉ. केके पाल ने वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल दोनो स्थानों पर वनाग्नि से बचाव के विशेषज्ञ दलों को भेजा गया है। दलों ने तत्काल प्रभाव से बचाव कार्य शुरू कर दिया है। पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल को नोडल बनाया गया है। गुंज्याल एनडीआरएफ., एसडीआरएफ एवं संबंधित जिलाधिकारी तथा मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल और कुमाऊं) से समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा एवं जान-माल को होने वाला नुकसान बचाने के लिए एहतियात बरतना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वन विभाग की वेबसाइट www.forest.uk.gov.in पर आगामी 7 दिनों के लिए संभावित फायर प्वाइंटस एवं वन क्षेत्र की स्थिति व नाम प्रतिदिन अपलोड किए जा रहे हैं। भुवन पोर्टल पर प्रतिदिन की वनाग्नि से संबंधित सूचना भी प्राप्त की जा सकती है।
राज्य में जनपदवार वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सूची तथा आगामी 15 दिनों के लिए मौसम की स्थिति संबंधी सूचना उपलब्ध है। इसके अलावा यूपी के मुख्य सचिव से समन्वय स्थापित कर अग्निशमन कर्मी तथा उपकरण भी उत्तर प्रदेश से मंगाकर अग्नि प्रभावित क्षेत्रों में लगाए जा रहे है।
वनाग्नि की सूचना दें
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.वन मित्र -9208008000
.आपात कालीन सेवा-108