हरिद्वार जनपर में सिडकुल के सेक्टर-1ए स्थित पाइन पैकेजिंग फैक्ट्री में आग लगने से लाखों का नुकसान हो गया। फायर ब्रिगेड के दस्ते ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
बोतलों की पैकेजिंग के उत्पादन से जुड़ी पाइन पैकेजिंग फैक्ट्री में सुबह साढ़े छह बजे एकाएक आग की लपटें धधक उठीं।
काबू नहीं हो सकी आग
शुरू में फैक्ट्री के कुछ कर्मियों ने सभी श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजकर स्वयं आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग काबू नहीं हो सकी और भड़कती चली गई।
बाद में अग्निशमन विभाग को सूचना देकर बुलाया गया। तब तक आग इतनी भड़क चुकी थी कि सिडकुल के फायर ब्रिगेड स्टेशन से चार टैंकर आग बुझाने के लिए बुलाने पड़े।
चार घंटे में पाया आग पर काबू
फायरब्रिगेड कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब चार घंटे में आग काबू की। हालांकि आग बाद में भी बार-बार भड़कती रही।
इसे देखते हुए अग्निशमन विभाग की ओर से देर शाम तक मौके पर एक टैंकर और चार जवान तैनात रहे जो आग बुझाने के प्रयास में जुटे रहे।
अग्निशमन विभाग की सुस्ती कंपनियों पर भारी
अग्निशमन विभाग की सुस्ती सिडकुल स्थित कंपनियों पर भारी पड़ रही है। न तो विभाग की ओर से कंपनियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है और न ही एनओसी लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
कंपनियां भी अग्नि सुरक्षा के प्रति चितिंत नहीं हैं, जिससे हर माह एक फैक्ट्री आग की चपेट में आ जाती है। सिडकुल प्रशासन भी एनओसी दिलाने के लिए अग्निशमन विभाग की सहायता नहीं कर रहा है।
अब तक हो चुके 38 अग्निकांड
जिला प्रशासन भी इस और से लापरवाह बना है। अग्निशमन विभाग की जांच में अधिकांश जली हुई फैक्ट्रियों के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण नहीं होता है। 25 मई को सिडकुल स्थित हर्बल फैक्ट्री फुंक गई थी।
इसके बाद कृषि उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री, बहादराबाद क्षेत्र में गैस चूल्हा बनाने वाली फैक्ट्री, बिस्कूट चौक के पास कृष्णा पैकेजिंग फैक्ट्री में आग लग गई थी। एक साल में जिले में अभी तक कुल 38 अग्निकांड हुए हैं लेकिन सिडकुल में जिस प्रकार फैक्ट्रियां जल रहीं हैं उससे कई सवाल उठ रहे हैं।
इनका कहना
आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। संबधित कंपनी से अग्निशमन की अनापत्ति से संबधित पत्रावलियां भी मांगी गई हैं। जांच के बाद सबकुछ सामने आ जाएगा।
- बीएल अगरी, अग्निशमन अधिकारी सिडकुल