व्यापक पारिवारिक डेटा होगा तैयार
मुख्य सचिव ने कहा कि परिवार पहचान पत्र का उद्देश्य प्रत्येक परिवार के लिए एक विशिष्ट पहचान के साथ परिवारों का सत्यापित, प्रमाणिक और विश्वसनीय डेटा तैयार करना है। इसे मौजूदा केंद्रीय और राज्य सरकार की सेवाओं और लाभों को जोड़ा जाएगा।
दस्तवेजीकरण और प्रमाणन में आएगी कमी
परिवार पहचान पत्र के माध्यम से दस्तावेजीकरण और प्रमाणन की आवश्यकता में कमी आएगी। विशिष्ट पहचान के माध्यम से प्रस्तावित प्रणाली या इंटरलिंक्ड विभाग प्रणालियों से एक्सेस किया जा सकेगा। इससे विभिन्न विभागों से संबंधित सेवाओं और लाभों के लिए निवासियों की जानकारी ली जा सकेगी।
सख्ती से लागू हो सकेंगे सरकार के नियम
यूनिक आईडी की सहायता उत्तराखंड सरकार के नियमों को सख्ती से लागू किया जा सकेगा। विभिन्न सेवाओं और कार्यों का कंप्यूटरीकरण के जरिये नागरिक राज्य और केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले लाभों और सब्सिडी की एक व्यापक सूची भी प्राप्त कर सकेंगे।
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हरियाणा और कर्नाटक राज्य सबसे आगे
बैठक में बताया गया कि हरियाणा और कर्नाटक परिवार पहचान अवधारणा को अपनाने में सबसे आगे रहे हैं। इससे इन राज्यों में किसी भी कल्याणकारी सेवा के आवेदन के लिए नागरिक को परिवार पहचान पत्र प्रदान करना आवश्यक है। इसके अलावा, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर में पहले से ही अपने-अपने राज्यों में रहने वाले परिवारों की विशिष्ट पहचान करने की अवधारणा पर काम हो रहा है।