केंद्रीय अनुदान तीन स्तरों पर बंटने से अब ग्राम पंचायतों का हिस्सा घट गया है। पहले की स्थिति में इन्हें पूरे 574 करोड़ रुपये मिलते। अब प्रदेश की 7500 से अधिक पंचायतों को केवल 200 करोड़ रुपये मिलेंगे। ऐसे में ग्राम पंचायतों के लिए राज्य सरकार को अपना हिस्सा बढ़ाना होगा। इन्हें राज्य से 35 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। हिस्सा बढ़ाने का यह काम राज्य वित्त आयोग को करना होगा। अभी नए राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियां नहीं आई हैं और चौथे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियां 2020-21 के लिए लागू हैं। इससे आगे के पांच सालों में अनुदान 15वें वित्त आयोग और राज्य के पांचवें वित्त आयोग की संस्तुतियों पर निर्भर करेेगा।
छावनी क्षेत्रों को भी हिस्सा देने को कहा
प्रदेश में नौ छावनी क्षेत्र हैं। 15वें वित्त आयोग ने शहरी निकायों को जारी किए अनुदान में छावनी क्षेत्रों को भी हिस्सा देने को कहा है। कुल अनुदान 278 करोड़ रुपये का है। आठ नगर निगम, 39 पालिकाओं और 47 नगर पंचायतों के साथ ही यह पैसा छावनी क्षेत्रों में भी बंटेगा। मुसीबत बंटवारे की है। प्रदेश सरकार इस समय राज्य स्तर पर जारी कुल अनुदान में से नगर निगमों को 40 प्रतिशत, पालिकाओं को 45 और नगर पंचायतों को 15 प्रतिशत दे रही है। अब यह तय किया जाना है कि किसका हिस्सा किस तरह से कम करके छावनियों को पैसा दिया जाए।
अब तीनों स्तर की पंचायतों को केंद्रीय अनुदान मिलेगा। यह बंटवारा चौथे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर हो सकता है। वैसे 15वें वित्त आयोग ने ग्राम पंचायतों को 70 से 85 प्रतिशत, क्षेत्र पंचायतों को 10 से 25 प्रतिशत और जिला पंचायतों को पांच से 15 प्रतिशत देने का सुझाव दिया है। ग्रामीण पंचायतों के साथ ही शहरी निकायों के मामले में प्रदेश सरकार को फैसला लेना पड़ेगा।
- इंदु कुमार पांडे, अध्यक्ष, पांचवां राज्य वित्त आयोग