कॉलेज-विश्वविद्यालय से राजनीति का ककहरा सीखने वाले कई चेहरे इस बार विधानसभा पहुंचने के लिए चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
कॉलेज से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले कुछ प्रत्याशी जहां मुख्यधारा की राजनीति में भी अपना मुकाम हासिल कर चुके हैं वहीं कई अन्य अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय डीएवी से सबसे ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
डीएवी महाविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष रहे हीरा सिंह बिष्ट डोईवाला से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। कैंट सीट से डीएवी में दो बार छात्रसंघ अध्यक्ष रहे सूर्यकांत धस्माना और पदाधिकारी रहे हरवंश कपूर लड़ रहे हैं। धर्मपुर सीट से लड़ रहे दिनेश अग्रवाल डीएवी छात्रसंघ उपाध्यक्ष और जोगेंद्र रावत महासचिव रहे हैं।
देवप्रयाग विधानसभा सीट पर गढ़वाल विवि के टिहरी परिसर छात्रसंघ अध्यक्ष रहे मंत्री प्रसाद नैथानी और बिड़ला परिसर छात्रसंघ अध्यक्ष रहे विनोद कंडारी लड़ रहे हैं। बद्रीनाथ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे गोपेश्वर महाविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी और उनके खिलाफ ताल ठोक रहे महेंद्र भट्ट ऋषिकेश महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके हैं।
ऋषिकेश महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राजपाल खरोला ऋषिकेश और छात्रसंघ पदाधिकारी रहे हिमांशु बिजल्वाण नरेंद्रनगर से चुनाव मैदान में हैं। टिहरी परिसर में अध्यक्ष रहे दिनेश धनै टिहरी और विक्रम सिंह नेगी प्रतापनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। कोटद्वार महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राजपाल बिष्ट चौबट्टाखाल से विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं। कोटद्वार से चुनाव मैदान में उतरे डा. हरक सिंह रावत भी बिड़ला परिसर अध्यक्ष रहे हैं। बिड़ला परिसर से ही अध्यक्ष रहे प्रदीप थपलियाल रुद्रप्रयाग से चुनाव मैदान में हैं।
दूसरी ओर कुमाऊं में भी ऐसे नेताओं की कमी नहीं हैं, जिन्होंने छात्रसंघ से अपनी राजनीति की शुरूआत की। द्वाराहाट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे मदन बिष्ट दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं। कपकोट से चुनाव लड़ रहे ललित फरस्वाण भी छात्रसंघ पदाधिकारी रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे पुष्कर सिंह धामी खटीमा से चुनाव मैदान में हैं। जबकि एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राम सिंह कैडा भीमताल से चुनाव मैदान में हैं।