उत्तराखंड में हल्द्वानी के गांधीनगर में गणेश महोत्सव के दौरान बवाल हो गया। इस बवाल में कई लोगों के घायल होने की सूचना है।
बताया गया कि महोत्सव में हुआ बवाल एकाएक नहीं था, इसकी चिंगारी तीन दिन पहले से सुलग रही थी। इस मामले ने पुलिस लापरवाही की पोल भी खुल गई है। पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशीलता को देखते हुए पर्याप्त फोर्स नहीं लगाई थी।
उपद्रवियों को भागने का पर्याप्त मौका दिया गया। यही नहीं घटनास्थल पर पकड़े गए लोगों को भी पुलिस ने छोड़ कर अपनी कमजोरी का एहसास कराया। पता चला कि पुलिस के त्योहार रजिस्टर में पहले के बवालों का जिक्र तक नहीं है। अब कार्रवाई करने के लिए पुलिस अधिकारी माहौल ठंडा होने का इंतजार कर रहे हैं।
बजरंग दल के जिला संयोजक ललित वाल्मीकि के मुताबिक पांडाल में बैठने को लेकर बवाल से दो दिन पहले दूसरे पक्ष ने अश्वनी को पीटा। इसके बाद हरिकेश के पुत्र से विवाद हुआ था। तीसरे दिन पार्षद और गणेश महोत्सव के आयोजकों से बवाल हुआ था।
सभी मामलों की जानकारी पुलिस को थी। पुलिस यह भी जानती थी कि चुनाव के बाद एवं उससे पहले से वाल्मीकि और सोनकर समुदाय के बीच तनाव है। इंतजार बस एक चिंगारी का था। बवाल के दिन पार्षद ने खुद को अपमानित समझा और दोनों पक्षों के बीच नफरत की आग भड़क उठी।
पुलिस अधिकारियों ने भी पूजास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए थे। इसी कारण उपद्रवियों को हमला करने का पर्याप्त मौका मिला। निर्दोष लोग इस घटना में घायल हुए। अब पुलिस अधिकारी भी प्रतिमा स्थल से लेकर विसर्जन तक की तैयारी का सुरक्षा प्लान तैयार करने लगे हैं।
सीओ जीसी टम्टा ने स्वीकार किया कि त्योहार रजिस्टर में पहले की घटनाओं का जिक्र नहीं है। पूजा की अनुमति देते समय आयोजक और स्थलों का भी पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।