उन्होंने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद उनके संघर्ष का असली दौर शुरू हुआ। वहां उनका कोई परिचित नहीं था। सबसे पहले रहने की व्यवस्था की और फिर बेटे का स्कूल में दाखिला कराया जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। लोगों से जानकारी जुटाकर उन्होंने अभिनय की दुनिया को समझा और ऑडिशन की प्रक्रिया सीखी।
संघर्ष के दिनों में आर्थिक स्थिति भी बेहद कठिन हो गई। एक समय ऐसा आया जब उनके पास पैसे तक खत्म हो गए। दीपक बताते हैं कि एक बार ऑडिशन के लिए जाते समय रास्ते में नदी आ गई। समय कम था इसलिए उन्होंने बेटे को गोद में उठाकर नदी पार कराई और समय पर ऑडिशन तक पहुंचाया।
50 से ज्यादा ऑडिशन के बाद मिली पहचान
उन्होंने बताया कि लगातार तीन-चार महीनों में करीब 50 से 55 ऑडिशन देने के बाद यज्ञ को एक टीवी सीरियल में काम मिला। शुरुआत में उसे केवल तीन दिन का रोल दिया गया था लेकिन उसके अभिनय से प्रभावित होकर निर्देशक ने उसे तीन दिन की जगह तीन महीने तक शो में बनाए रखा। इसके बाद यज्ञ को फिल्म पंगा में काम करने का अवसर मिला और फिर एक टीवी शो से उन्हें दर्शकों का प्यार मिला।