माता-पिता का तो जीवन ही बच्चों की इच्छा पूरी करने में बीत जाता है, लेकिन ऐसे माता-पिता कम होते हैं जो मृत शरीर भी बच्चों के नाम कर देते हैं। अधिवक्ता रमेश चंद्र जोशी और उनकी पत्नी माधवी जोशी ने भी यही काम किया है।
बेटे के पहले श्राद्ध पर लिया फैसला
उन्होंने बेटे प्रभु प्रतीक के पहले वार्षिक श्राद्ध पर मेडिकल कालेज को अपना शरीर दान कर उसकी अंतिम इच्छा पूरी की है। प्रभु की मौत पिछले साल पीलीकोठी के पास एक सड़क हादसे में हुई थी।
सड़क हादसे में हुई थी बेटे की मौत
श्री जोशी पीलीकोठी के पास रहते हैं। उनके इकलौते बेटे प्रभु (21) की मौत पिछले साल सड़क हादसे में हुई थी। प्रभु इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉ करने की तैयारी कर रहे थे।
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श्री जोशी ने बताया कि प्रभु अक्सर शरीर दान करने की बात करता था। वह कहता था कि ऐसा कर चिकित्सा विज्ञान की मदद की जा सकती है, लेकिन उसने कभी यह नहीं सोचा था कि भगवान उसे इतनी जल्दी दुनिया से बुला लेगा।