शुक्रवार सुबह मंदिर का दूसरा सेवादार वासुदेव भगत पहुंचा तो लोगों को घटना की जानकारी हुई। रंपुरा चौकी पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इधर, मृतक के बेटे राजेंद्र ने पुलिस को तहरीर देकर पिता की हत्या का अंदेशा जताकर जांच की मांग की है।
कोतवाल केसी भट्ट का कहना है कि चंद्रपाल कमरे में बिस्तर के पास ही हीटर जलाकर सो रहे थे, जिससे माना जा रहा है कि हीटर पर कपड़ा गिर गया होगा और बिस्तर के साथ चंद्रपाल आग की चपेट में आकर झुलस गए और उनकी मौत हो गई होगी। फिर भी मामले की जांच की जा रही है।
चंद्रपाल का जला शव मामले को संदिग्ध बना रहा है। परिजनों के अनुसार, चंद्रपाल ने तख्त में पैरों की ओर हीटर जलाकर रखा था, लेकिन इसके बाद भी चंद्रपाल के पैर नहीं जले, जबकि धड़ पूरी तरह झुलस गया। चंद्रपाल का शव भी जमीन पर पड़ा मिला और छाती पर घाव के निशान थे। साथ ही कमरे में लकड़ी या लोहे के दरवाजे की जगह सलाखों का गेट लगा था, जिससे आग की लपटें बाहर भी आतीं और चंद्रपाल के चिल्लाने का शोर भी लोगों को सुनाई देता, लेकिन रात में किसी को कुछ पता नहीं चला।
तीन साल से लापता है बेटा
चंद्रपाल की चार बेटियां और तीन बेटे हैं। बेटियों की शादी हो गई और दो बेटे वेदप्रकाश और राजेंद्र चंद्रपाल के साथ ही रहते हैं। छोटे बेटे सुनील का तीन साल पहले क्षेत्र के ही किसी युवक से विवाद हुआ था, तब से सुनील लापता है। सुनील की खोजबीन के लिए चंद्रपाल ने हाईकोर्ट तक गुहार लगाई लेकिन आज तक उसका सुराग नहीं लग पाया।