ओस्टियोपोरोसिस (अस्थि क्षरण) रोग का असहनीय दर्द झेल रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है।
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आईआईटी रुड़की के भौतिक विज्ञानियों ने एक ऐसे नैनो मैटेरियल की खोज की है, जिससे न केवल बीमारी से पीड़ित मरीजों को दर्द से निजात मिलेगी, बल्कि इस बीमारी से हड्डियों को गलने से भी बचाया जा सकेगा। आईआईटी के भौतिक विज्ञानियों का दावा है कि इन नैनो मैटेरियल के इस्तेमाल से मरीजों का बेहद सस्ते खर्चे पर बेहतर इलाज किया जा सकेगा।
आईआईटी रुड़की के भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. केएल यादव की अगुवाई में शोध विज्ञानियों की चार सदस्यीय टीम ने ‘मैग्नेटिक पॉलीमर कंपोजिट मैट्रिक्स’ नैनो मैटेरियल तैयार किया है। इसमें ‘फैरोमेग्रेटिक नैनो पार्टिकल’ के साथ ही ‘विनायली फ्लोराइड पार्टिकल’ का इस्तेमाल किया गया है।
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हाइपोथर्मिया तकनीक के जरिए इलेक्ट्रो मेग्नेटिक रेडिएशन दिया जाएगा
क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करेगा
- फोटो : Demo Pic
भौतिक विज्ञानी प्रो. यादव के मुताबिक उनकी टीम की ओर से खोजे गए नैनो पार्टिकल को इंजेक्शन के जरिए मरीज के घुटने में डाला जाएगा और फिर हाइपोथर्मिया तकनीक के जरिए इलेक्ट्रो मेग्नेटिक रेडिएशन दिया जाएगा।
चिकित्सकों द्वारा रेडिएशन दिए जाने के बाद नैनो मैटेरियल पूरे घुटने में फैल जाएगा जो पूरे घुटने में आसपास स्थित मजबूत कोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए ओस्टियोपोरोसिस (अस्थि क्षरण) बीमारी से क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करेगा।
भौतिक विज्ञानी प्रो. यादव के मुताबिक प्रयोगशाला में तैयार किए गए नैनो मैटेरियल का ‘कॉस्मोल’ मल्टी फिजिक्स साफ्टेवयर के जरिए परीक्षण करने के साथ ही बॉयोलॉजिकल टेस्ट भी किया जा चुका है।
क्या हैं ओस्टियोपोरोसिस बीमारी के लक्षण
ओस्टियोपोरोसिस बीमारी में घुटने और पीठ में असहनीय दर्द के साथ ही रोगी की लंबाई भी घट जाती है। चलने फिरने में दर्द होता है। बीमारी गंभीर हो तो रीढ़ की हड्डी टूटने के साथ ही कूल्हे की हड्डियां टूटने लगती हैं। इस बीमारी की गिरफ्त में आए 30 फीसदी मरीजों के कूल्हे की हड्डियां टूट जाती है।
महिलाओं में बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा
अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन अग्रोही के मुताबिक ओस्टियोपोरोसिस (अस्थि क्षरण) बीमारी का खतरा महिलाओं में ज्यादा होता है। तमाम कारणों के चलते महिलाओं में विटामिन डी की भारी कमी हो जाती है जिससे इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा मोटापाग्रस्त और समय से पूर्व रजोनिवृत्ति वाली महिलाओं में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। एक अनुमान के मुताबिक देश में 46 मिलियन महिलाएं ओस्टियोपोरोसिस बीमारी से जूझ रही है।
शराब के अत्यधिक सेवन से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है
चिकित्सकों के मुताबिक शरीर में विटामिन डी की कमी, शराब के अत्यधिक सेवन, अत्यधिक धूम्रपान, शरीर के बेहद आराम देने से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। एक्सरे या बोन मिनरल डेंसिटी यानी बीएमडी टेस्ट की मदद से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
हर वर्ष बीमारी से टूट जाती हैं पांच लाख मरीजों की रीढ़ की हड्डियां
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो ओस्टियोपोरोसिस बीमारी के चलते हर साल देश में पांच लाख मरीजों की रीढ़ की हड्डियां टूट जाती है। तीन लाख मरीजों के कूल्हे, दो लाख मरीजों की कलाई और तीन लाख मरीजों के शरीर की हड्डियां टूट जाती हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने मरीजों की हड्डियां किसी दुर्घटना में नहीं बल्कि चलते समय अचानक गिर जाने से टूट जाती हैं। आंकड़ों के मुताबिक ओस्टियोपोरोसिस के 100 रोगियों में 80 महिलाएं होती है। 65 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।