12:00 बजे किसान बोट क्लब पर एकत्र हुए
02:00 बजे किसान बोट क्लब से रेलवे स्टेशन के लिए निकले
02:20 बजे किसान रेलवे स्टेशन पर पहुंचे
02:25 बजे किसान रेलवे स्टेशन पर किसानों और पुलिसकर्मियों में धक्कामुक्की
02:35 बजे किसान स्टेशन पर धरने पर बैठे
02:45 बजे विधायक ममता राकेश किसानों के बीच पहुंची
04:15 बजे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल किसानों के बीच पहुंची
5:30 बजे किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन पर समाप्त किया धरना
ये लोग रहे मौजूद
भगवानपुर विधायक ममता राकेश, पूर्व विधायक अंबरीष कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड, जिलाध्यक्ष महकार सिंह, जिला पंचायत सदस्य अदनान नवाज, कटार सिंह, दुष्यंत कुमार, राज सिंह, पप्पू भाटिया, पवन त्यागी, सिकंदर त्यागी, सुखपाल मुखिया, मोहम्मद अब्बास, रविंद्र त्यागी, मोहम्मद आजम, आकिल, सुरेंद्र, धर्मवीर प्रधान, आदित्य, सोहनवीर, चादवीर, नरेश लोहान, भूपेश शर्मा, जय सिंह प्रधान, नरेंद्र सिंह, सतबीर प्रधान, कामिल प्रधान, इकबाल प्रधान, अरविंद, वीरेंद्र सैनी, ज्ञानचंद, आकिल सैनी, मोहम्मद जाकिर आदि मौजूद रहे।
प्रशासन के फूले रहे हाथ पांव
सोमवार को सुबह से ही पुलिस और प्रशासन के हाथ पांव फूले रहे। गंगनहर पुल सहित बोट क्लब आदि स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वहीं बोट क्लब पर किसानों के पहुंचने की पल पल जानकारी ली जाती रही ताकि किसानों की भीड़ का आकलन कर सुरक्षा के इंतजाम किए जा सके। बताया जाता है कि शनिवार की देर रात और सुबह तक किसानों के साथ आंदोलन को स्थगित करने के लिए वार्ता होती रही, लेकिन किसान किसी भी ठोस कार्रवाई के बिना मानने को तैयार नहीं थे।
सत्र 2017-18 का शुगर मिल पर करीब 73 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। वहीं सत्र 2018-19 का 109 करोड़ का भुगतान बकाया है। इसके चलते दो साल का करीब 182 करोड़ का भुगतान बकाया है। शुगर मिल के द्वारा गोदाम आदि सील होने के कारण लंबे समय से भुगतान नहीं किया जा रहा है।
चीनी की नीलामी के बाद भी रह जाएगा भुगतान
यदि भुगतान की स्थिति पर नजर डाले, तो दोनों साल का करीब 182 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं शुगर मिल में करीब 139 करोड़ की चीनी पड़ी है। यदि पूरी चीनी की भी नीलामी कर दी जाए तो भी किसानों का भुगतान पूरा नहीं होगा, लेकिन किसानों को 139 करोड़ के भुगतान से भी भारी राहत मिलेगी।
जेएम की ओर से आश्वासन मिला है कि चीनी की नीलामी को आगे पीछे नहीं किया जा सकता है। लिहाजा किसानों के साथ बैठक कर नीलामी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएंगा। ताकि तीन सितंबर को चीनी की नीलामी हो जाए। जिस आश्वासन पर फिलाल तीन सितंबर तक आंदोलन टाल दिया गया है। तीन सितंबर को नीलामी नहीं होती है। तो रेल और सड़कों दोनों रोकी जाएगी।
- गुलशन रोड, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उकिमो