उत्तराखंड में सगंध तेलों का बाजार तलाशने की कवायद शुरू हो गई है। रविवार को सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र में डस्ट्री-फार्मर मीट आयोजित की गई।
ये लोग रहेंगे मौजूद
इसमें सगंध फसलों की खेती, प्रसंस्करण से जुड़े 75 प्रगतिशील किसानों के साथ ही नई दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, कन्नौज, कानपुर, लखनऊ, रामपुर, मुरादाबाद आदि स्थानों से परफ्यूमरी इंडस्ट्री के 35 विशेषज्ञ, उद्योगपति शामिल होंगे।
शनिवार को सगंध पौधा केंद्र के प्रभारी नृपेंद्र चौहान, वैज्ञानिक ‘सी’ सुनील शाह और मुंबई के उद्योगपति केकेआर मूर्ति ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को मीट के संबंध में जानकारी दी।
बताया कि प्रदेश में 14 हजार किसान सगंध पौधों की खेती से जुड़े हैं। तकरीबन 42 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में इनकी खेती हो रही है। इनमें लेमनग्रास, जापानी मिंट, रोज, तेजपाल, कैमोमाइल प्रमुख है। कुल उत्पादन 1372 टन है।
किसानों को हो गया फायदा
उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता और उपलब्धता का फायदा किसानों को भी हो, प्रयास यही है। उधर, कई स्थानों से पहुंचे उद्योगपतियों को रानीपोखरी स्थित सगंध तेल कलस्टर का भ्रमण भी कराया गया।
उन्हें किसानों की लगाई लेमनग्रास, कैमोमिल, चंदन, लेमन बाम, वन अजवाइन आदि के खेत दिखाए गए। यहां स्थापित प्रसंस्करण ईकाई से आसवित लेमनग्रास, लैंटाना का अवलोकन भी कराया गया।