पहाड़ों से जहां लोग पलायन कर रहे हैं और भवन खंडहर एवं खेत बंजर हो होते जा हैं। ऐसे में उत्तराखंड के पौड़ी और अल्मोड़ा जिले के 311 किसानों ने पिछले कई वर्षों से बंजर 55हेक्टेयर भूमि पर डेमस्क गुलाब, लैमनग्रास, तेजपात एवं तिमूर के सुगंधित पौधों की खेती कर बंजर भूमि को फिर से हराभरा किया है।
गढ़वाल मंडल के पौड़ी और कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के कई गांवों के किसान जंगली जानवरों के फसलों को नुकसान, सिंचाई और ढुलान की समस्या के चलते खेती छोड़ चुके थे।
पिछले डेढ़ से दो दशकों से यहां खेत बंजर थे, लेकिन पौड़ी जनपद के जयहरीखाल ब्लॉक के ग्राम पीड़ा, ग्राम चुण्डई, कन्दौली, बाडियू, घांघली, मझौला, रिगनाना, सिसल्डी, किमार, रणकोट, मथला, चमेड़ा, कफल्डी, मदौला, इगयारा, सुरमाडी एवं सकमुंडा के ग्रामीणों ने मार्च 2014 में परंपरागत खेती के बजाए सगंध पादपों की खेती करने का निर्णय लिया।
उन्होंने सगंध पौधा केन्द्र (कैप) सेलाकुई के सहयोग से कलस्टर बनाकर खेती की शुरूआत की। वही कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे ब्लॉक के ग्राम तामाढौन,सिमलगुना,उदयपुर, गोलना,बलमरा आदि गांवों के ग्रामीणों ने सगंध पादपों की खेती की। ग्रामीणों की एक साल पहले की पहल और मेहनत आज हरे भरे खेतों के रूप में रंग लाई है। खेती से क्षेत्र के कई किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
हरे भरे हुए बंजर खेत
ग्राम देघाट के किसान रामानंद ने कहा कि कैप के प्रयास से बंजर भूमि पर फिर से खेती की शुरूआत हुई है। अब क्षेत्र में एक आसवन संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से सगंध फसलों का आसवन किया जा सकेगा। क्षेत्र में संयंत्र लगने से फसलों के ढुलान की समस्या दूर होगी।
आसवन संयंत्र से ढुलान की समस्या हुई दूर
पीड़ा कलस्टर में सगंध पौधा केन्द्र की ओर से 10 कुंतल क्षमता का एक आसवन संयंत्र कृषकों के खेतों में स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से लैमनग्रास की पत्तियों के आसवन उपरांत सुगंधित तेल प्राप्त किया जा रहा है।
सगंध पादपों की खेती में सिंचाई की उतनी अधिक आवश्यकता नहीं होती, वही जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते, ऐसे में बंजर भूमि पर इसकी आसानी से खेती की जा सकती है, जो गढ़वाल और कुमाऊं के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों के लिए आज फायदेमंद साबित हो रही है।
- नृपेंद्र चौहान, प्रभारी वैज्ञानिक सगंध पादप केंद्र सेलाकुई देहरादून