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खेत में बर्बाद फसल देख सदमे से मर गया किसान

Mon, 04 May 2015 02:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, जसपुर (ऊधमसिंह नगर)
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उत्तराखंड में बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान से जसपुर के एक किसान की रविवार को खेत में ही सदमे से मौत हो गई। प्रदेश में फसलों को नुकसान होने पर किसी किसान की मौत का यह पहला मामला है।
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11 मई को किसान की बड़ी बेटी की शादी होनी है। किसान की मौत की सूचना मिलने पर एसडीएम और तहसीलदार किसान के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाते हुए मदद करने का भरोसा दिलाया।

जसपुर के ग्राम रायपुर निवासी भोला सिंह (40) पुत्र बुद्ध सिंह की ढाई एकड़ भूमि थी। पिछले दिनों अत्यधिक बारिश और ओले गिरने से उसकी पूरी फसल बर्बाद हो गई। इसके बाद से वह सदमे में था। रविवार सुबह भोला सिंह खेत गए थे, जहां सदमे से उनकी मौत हो गई।
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किसान की मौत की सूचना पर एसडीएम विनीत कुमार और तहसीलदार गौरव चटवाल उसके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। किसान के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। एसडीएम विनीत कुमार ने बताया कि मृतक पीआरडी जवान भी था।

इसलिए वह कृषक की श्रेणी में नहीं आते। फिर भी सरकार से मिलने वाली योजनाओं के अंतर्गत उनके आश्रितों को आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। वह इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजेंगे।
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हाथी रातभर फसलें कर रहे चट, ग्रामीण परेशान

उधर, देहरादून के सेलाकुई में तीन दिन से सभावाला और माजरी गांव में हाथी धमक रहे हैं। हाथियों के आतंक से लोग परेशान हैं। हाथी गन्ने के साथ ही गेहूं की फसल को रौंद रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी वन विभाग सुध नहीं ले रहा है।

इन दिनों देहरादून वन प्रभाग के मल्हान रेंज में हाथी सक्रिय हैं। रात होते ही हाथी गांव के करीब खेतों में धमक रहे हैं। रातभर फसलें चट करने के साथ ही रौंदकर बर्बाद भी कर रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमरूद्दीन, मौजूदीन, शमशुद्दीन, लाला अशोक, अब्दुल रहीम का कहना है कि हाथी लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

शिकायत के बाद भी वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की है। एसडीओ गुलबीर सिंह ने बताया कि रेंज अधिकारी को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावितों को नियमों के मुताबिक मुआवजा दिया जाएगा। हाथियों को दूर रखने के लिए किसानों को पटाखे वितरित किए जाएंगे।
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गन्ने में लगी बीमारी, किसान परेशान

रुड़की के चुड़ियाला इन दिनों गन्ने की फसल में तना छेदक रोग लग गया है। तना छेदक रोग जहां पौधे के तने को नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं किसानों के अनुसार रोग का कीट पौधे के पत्तों को चट कर रहा है।

जिससे पौधा सूख कर कमजोर पड़ रहा है। किसानों को गन्ने का उत्पादन कम होने की आशंका सता रही है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं।

किसान सुभाष चौधरी, संजय त्यागी, महेंद्र आदि का कहना है कि रोग के कारण उन्हें गन्ने को बचाने के लिए कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना पड़ रहा है।

कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि दोनों रोगों को मोनोक्रोटोफास या डाइक्लोरोवास दवा के स्प्रे से दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक लीटर दवा को प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करके रोगों से निजात मिल सकती है।
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