तमिलनाडु में उगने वाले पौधे ‘मीलिया कम्पोजिटा’ के क्लोन के जरिए वन विभाग उत्तराखंड के किसानों की किस्मत बदलने की कोशिश में जुटा है। हल्द्वानी स्थित वन शोध केंद्र में इसका क्लोन तैयार किया जा रहा है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक दो-तीन वर्षों में राज्य के किसान इसे खेतों में लगा सकेंगे। आठ वर्ष में तैयार होने वाला यह पेड़ इमारती और मजबूत लकड़ियों के बूते पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए कमाई का अहम जरिया बन चुका है।
प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव और वन शोध केंद्र प्रभारी अनिल कुमार दत्त ने बताया कि हल्द्वानी शोध केंद्र में इस पौधे के क्लोन पर काम चल रहा है। दो-तीन साल में इसका सर्वोत्तम क्लोन तैयार हो जाएगा, जो उत्तराखंड की आबोहवा में उगकर तेजी से विकास करेगा।