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पेड़ का 'क्लोन' करेगा किसानों को मालामाल

Tue, 23 Dec 2014 04:57 PM IST
सत्यपाल चौधरी / अमर उजाला, देहरादून
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तमिलनाडु में उगने वाले पौधे ‘मीलिया कम्पोजिटा’ के क्लोन के जरिए वन विभाग उत्तराखंड के किसानों की किस्मत बदलने की कोशिश में जुटा है। हल्द्वानी स्थित वन शोध केंद्र में इसका क्लोन तैयार किया जा रहा है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक दो-तीन वर्षों में राज्य के किसान इसे खेतों में लगा सकेंगे। आठ वर्ष में तैयार होने वाला यह पेड़ इमारती और मजबूत लकड़ियों के बूते पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए कमाई का अहम जरिया बन चुका है।

प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव और वन शोध केंद्र प्रभारी अनिल कुमार दत्त ने बताया कि हल्द्वानी शोध केंद्र में इस पौधे के क्लोन पर काम चल रहा है। दो-तीन साल में इसका सर्वोत्तम क्लोन तैयार हो जाएगा, जो उत्तराखंड की आबोहवा में उगकर तेजी से विकास करेगा।
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7-8 साल में पेड़ के रूप में तैयार होगा पौधा

इनमें तेजी से बढ़ने वाली नस्ल को उत्तराखंड में पैदावार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ‘मीलिया कम्पोजिटा’ का पौधा 7-8 वर्षों में पेड़ के रूप में तैयार हो सकेगा। इसकी लकड़ी उच्चकोटि के फर्नीचर, प्लाइवुड और कृषि उपकरण बनाने के काम आती है।

‘मीलिया कम्पोजिटा’ की खासियत
1. इसकी लकड़ी में दीमक नहीं लगती। इसके चलते इसका फर्नीचर बेहद मजबूत होता है।
2. बेहद तेजी से बढ़ने वाले इस पेड़ को किसान पापुलर की तरह खेतों में लगा सकते हैं।
3. यह मधुमक्खी पालन में भी मददगार है। मधुमक्खियां इसके फूलों का रस चूसती हैं।
4. विभिन्न राज्यों की आबोहवा के मुताबिक इसके क्लोन बेहद आसानी से तैयार होते हैं।
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