बस हादसे में छह लोगों की मौत की फर्जी सूचना सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष और एक महिला समेत तीन लोगों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस पर दो लोगों ने पुलिस से लिखित माफी मांगी है। पुलिस ने दोनों का 250-250 रुपये का चालान काटकर चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया है।
मंगलवार को सोशल मीडिया में टनकपुर से लोहाघाट के लिए रवाना हुई रोडवेज की एक बस के अमोड़ी के पास खाई में गिरने एवं दुर्घटनाग्रस्त बस की फोटो वायरल हुई। इसमें लिखा था कि बस हादसे में छह लोगों की मौत हुई। एक ग्रुप से दूसरे ग्रुप में फैली इस खबर से थोड़ी ही देर में पुलिस एवं जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। इधर गंतव्य पर निकले यात्रियों के परिजन भी बेचैन हो गए। हादसे की जानकारी लेने के लिए अस्पतालों, थानों एवं पत्रकारों के फोन घनघनाने लगे। कहीं से हादसे की पुष्टि नहीं होने पर पुलिस अधिकारियों ने वायरल खबर के झूठ होने की पुष्टि की।
इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सीओ ने बताया कि वायरल फोटो नैनीताल जिले में पहले हुए बस हादसे की थी। इधर, डीएम डॉ. अहमद इकबाल के निर्देश पर पुलिस की आईटी सेल की जांच के बाद एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने खबर पोस्ट करने वाले लोहाघाट निवासी कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह धौनी को, सीओ आरएस रौतेला ने टनकपुर निवासी महिला लक्ष्मी वर्मा एवं चंद्रशेखर ओली को आईटी एक्ट के तहत नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
दूसरे नंबर से आया मैसेज, बिना परखे कर दिया फारवर्ड
टनकपुर निवासी लक्ष्मी वर्मा और चंद्रशेखर ओली ने थानाध्यक्ष को भेजे पत्र में बताया कि मैसेज दूसरे नंबरों (8958604207 व 9756268570) से आया था। उन्होंने इसकी पड़ताल किए बगैर मैसेज को दोस्तों को फारवर्ड कर दिया। इससे आम लोगों से लेकर पुलिस व प्रशासन को हुई परेशानी के लिए खेद जताते हैं। आगे से मैसेज की सत्यता परख कर फारवर्ड करने की बात कही है। इधर एसपी धीरेंद्र गुंज्याल का कहना है कि दोनों का 250-250 रुपये का चालान किया गया है। साथ ही भविष्य में इस तरह की गैर जिम्मेदाराना कार्य नहीं करने की चेतावनी दी गई है। पुलिस ने भ्रामक सूचना मामले में कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह धौनी को भी नोटिस भेजा है। हालांकि अभी उनकी ओर से पुलिस को कोई पत्र नहीं मिला है। धौनी ने यह मैसेज कहीं से आने की बात कही है।
पहले भी दो लोगों को जारी हुए थे नोटिस
जिले के इससे पहले भी सोशल मीडिया पर रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर झूठी खबर वायरल करने के मामले में दो लोगों को पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत नोटिस जारी किया था। लिखित माफी मांगने पर उन्हें हिदायत देकर छोड़ा गया था।