दस्तावेज सत्यापन से जुड़ी कनाडा की कंपनी डब्ल्यूईएस ने कुमाऊं विश्वविद्यालय को पोस्ट और ईमेल के माध्यम से कुछ मार्कशीट व डिग्रियां सत्यापन के लिए बीते दिनों भेजीं थीं। विवि ने जांच की तो शुरूआत में 12 मार्कशीट व डिग्रियां फर्जी साबित हुईं।
जालसाजी का इतना बड़ा खुलासा होने के बाद विवि प्रशासन चौंक गया। नए सिरे से सभी डिग्रियों और मार्कशीटों की जांच की गई तो एक के बाद एक 22 मार्कशीट व डिग्रियां अब तक फर्जी साबित हो चुकी हैं। जो 18 मुन्ना भाइयों की हैं।
फर्जी डिग्रियां व मार्कशीट बनाने वालों पर कार्रवाई के लिए विवि प्रशासन ने 29 दिसंबर को कनाडा की संस्था डब्ल्यूईएस से आरोपी छात्र-छात्राओं का पता व अन्य जानकारी मांगी थी, जो विवि को मंगलवार को भी नहीं मिल सकी। अब विवि प्रशासन छह जनवरी तक इंतजार करने के मूड में है। अगर छह को भी डब्ल्यूईएस से कोई जवाब नहीं आया तो विवि आरोपियों के खिलाफ सिर्फ नामों के आधार पर ही रिपोर्ट दर्ज करवा देगा।
जालसाजों ने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के निजी संस्थानों के साथ-साथ वहां के सरकारी संस्थानों से भी धोखाधड़ी की है। विवि प्रशासन के पास ऑस्ट्रेलिया के दूतावास से करमजीत कौर और करन मेहरा की मार्कशीट पहुंची थी, जो सोमवार को जांच में फर्जी साबित हो गई।
इसी तरह कनाडा दूतावास से आई जोधवीर सिंह की मार्कशीट जांच में फर्जी निकली है। कुविवि के उप परीक्षा नियंत्रक डा. रितेश साह ने बताया कि दूतावास से आईं डिग्रियों व मार्कशीट से प्रतीत होता है कि जालसाज आस्ट्रेलिया व कनाडा में फर्जी दस्तावेजों से किसी तरह का सरकारी लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।
जालसाजों पर हर हाल में होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन जालसाजों तक पहुंचने का हरसंभव प्रयास करेगा। इसके लिए कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल से लगातार वार्ता चल रही है। सात जनवरी तक हर हाल में आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज करवा दी जाएगी।
प्रो. संजय पंत, परीक्षा नियंत्रक कुविवि