10 रुपये प्रति माह किराये पर रहते थे सौराब के दादा
सौराब के दादा का नाम असलम खां था। वह रिस्पना के पास 10 रुपये प्रति माह किराये के कमरे में रहते थे। इसके बाद उनके बेटे कासिम खां यानी सौराब के पिता 50 गज के मकान में रहते थे, जो कि कब्जा कर बनाया गया था। ऐसे में यदि सौराब के परिवार का ताल्लुक शेर मोहम्मद खां से होता तो उन्हें इस तरह जीवन व्यतीत करने की जरूरत नहीं पड़ती। वह पहले से इस संपत्ति पर काबिज रहते। जबकि, यह संपत्ति 2007 से पहले से खाली पड़ी हुई थी।
नगर निगम ने भी नहीं की जांच
इस मामले में जितनी गलती सौराब खां की है उससे ज्यादा लापरवाही नगर निगम के स्टाफ की रही। सौराब खां ने जब पुराने मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रार्थनापत्र दिए तो इनकी सही से जांच नहीं की गई। राजस्व रिकॉर्ड को भी नहीं देखा गया। जबकि, राजस्व रिकॉर्ड में इस संपत्ति के सारे दस्तावेज मौजूद हैं। बिना देखे जांचे ये पुराने मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। साथ ही बाद में इनका वारिसान भी रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया।