राज्यस्तरीय नेत्र अस्पताल के इंतजार में मरीजों की आंखें पथराने लगी हैं। उच्चीकरण के दावे के साथ आठ वर्ष पूर्व बना-बनाया नेत्र अस्पताल उजाड़ दिया गया, लेकिन इसकी जगह नया भवन अब तक नहीं बना।
नई ईंट लगना तो दूर, कुछ दिन पूर्व शिलान्यास का पत्थर टूटकर गिरा तो इसे भी एक कमरे में रख बंद कर दिया गया।
पैसे का भी संकट
ऐसे में अस्पताल के लिए केंद्र से मिली 9.87 करोड़ की रकम भी वापस होने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही उपकरणों के लिए प्रस्तावित बाइस करोड़ रुपए पर भी संकट बन गया है।
प्रीतम रोड स्थित गांधी शताब्दी नेत्र अस्पताल का संचालन वर्ष 1970 से डिस्ट्रिक्ट आई रिलीफ सोसाइटी करती रही है।
2005 में आया था प्रस्ताव
वर्ष 2005 में इसे राज्य सरकार में निहित करने का प्रस्ताव आया। योजना थी कि यहां राज्य स्तरीय नेत्र चिकित्सा केंद्र बनाया जाएगा। लेकिन इस योजना को हकीकत की जमीं पर उतरने का इंतजार है।