राजधानी में जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अवैध वसूली चल रही है। वह भी दो-चार सौ रुपए नहीं, बल्कि आठ से दस हजार रुपए प्रतिदिन।
जी हां, परिसर में पार्किंग के लिए तय जगहों पर वाहन पार्क करने के लिए ठेकेदार तय से दोगुनी रकम वसूल रहे हैं। खास बात यह है कि वसूली जाने वाली रकम की पर्ची भी वाहन स्वामियों को दी जाती है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है। जबकि इस तरह पार्किंग ठेकेदार राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं।
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जिलाधिकारी कार्यालय में प्रतिदिन लगभग तीन सौ चार पहिया एवं पांच सौ से अधिक दोपहिया वाहन चालक पहुंचते हैं। यहां पार्किंग में ठेकेदार साइकिल वालों से पांच रुपए, स्कूटर-बाइक वालों से दस रुपए और कार वालों से बीस रुपए वसूलते हैं।
इसकी पर्ची भी दी जाती है, जिससे वाहन स्वामी यही समझते हैं कि पार्किंग का यही शुल्क तय होगा। लेकिन आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से साफ हुआ है कि यहां पार्किंग में साइकिल के लिए दो, स्कूटर बाइक के लिए पांच और कार के लिए दस रुपए शुल्क तय है। साफ है कि ठेकेदार मनमर्जी से दोगुनी राशि वसूलते हैं।
यहां है पार्किंग
उप जिलाधिकारी सदर नगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय के सामने, रजिस्ट्री कार्यालय के सामने बने पार्क एवं कलक्ट्रेट परिसर स्थित कैंटिन के सामने खाली स्थान पर
नहीं लगाया है बोर्ड
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पार्किंग ठेकेदार के लिए पार्किंग स्थलों पर दो बोर्ड लगाना अनिवार्य शर्त रखी गई थी। इन बोर्डों पर पार्किंग शुल्क की जानकारी देने को कहा गया था, लेकिन यहां एक भी बोर्ड नहीं है।
ठेकेदार के लिए पार्किंग शुल्क तय किए गए हैं। परिसर में निर्धारित दर की जानकारी के लिए बोर्ड लगवाए जाएंगे। ठेकेदार अधिक रेट वसूल रहा है तो उसके लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
- जीसी गुणवंत, सिटी मजिस्ट्रेट