18 की जगह 24 कोच की ट्रेनें संचालित किए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को एडीआरएम एनएन सिंह व उत्तर रेलवे के मुख्य अभियंता की अगुवाई में उच्चस्तरीय टीम ने देहरादून और हर्रावाला रेलवे स्टेशन का सर्वे किया। उच्चस्तरीय टीम ने संभावनाएं तलाशी कि आखिरकार दोनों रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफार्म की रीमोडलिंग जा सकती है या नहीं?
सर्वे के बाद उच्चस्तरीय टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उसके अनुसार ही रेलवे बोर्ड और उत्तर रेलवे स्तर पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एडीआरएम एनएन सिंह ने बताया कि देहरादून रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म के विस्तारीकरण को लेकर संभावनाएं थोड़ी कम हैं। रेलवे की जिन जमीनों पर प्लेटफार्मों का विस्तारीकरण होना है, उन पर बड़े पैमाने पर कब्जा है। उन्होंने कहा कि हर्रावाला रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की रीमॉडलिंग कर 24 कोच वाली ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। वहां प्लेटफार्म के विस्तारीकरण को लेकर पर्याप्त जमीन है। यदि, थोड़ी बहुत जमीन कम पड़ेगी तो राज्य सरकार से मदद ली जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उत्तर रेलवे के मुख्य अभियंता अचल जैन, मुख्य अभियंता यांत्रिक अर्चना समेत मंडल मुख्यालय के कई अधिकारी उपस्थित थे।
----
18 कोच की ट्रेनों से रेलवे को वित्तीय नुकसान
एडीआरएम एनएन सिंह ने बताया कि दून रेलवे स्टेशन से संचालित ट्रेनों में सिर्फ 18 कोच होने की वजह से रेलवे को वित्तीय नुकसान हो रहा है। कहा कि जितना खर्च 18 कोच की ट्रेनों के संचालन पर आता है उतना ही 24 कोच की ट्रेनों पर। देश के तमाम रेलवे स्टेशनों से 24 कोच वाली ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था है। सिर्फ देहरादून ही ऐसा स्टेशन है जहां से 18 कोच वाली ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
----
सुपरफास्ट ट्रेनों के संचालन का होगा रास्ता साफ
दून रेलवे स्टेशन से राजधानी एक्सप्रेस संचालित किए जाने की योजना प्रस्तावित है, लेकिन जगह कम होने की वजह से संचालन नहीं हो पा रहा है। यदि देहरादून या हर्रावाला रेलवे स्टेशनों से 24 कोच वाली ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था हो जाती है तो राजधानी जैसी सुपरफास्ट ट्रेनों के संचालन का भी रास्ता साफ हो जाएगा।