विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों के लिए उच्च शिक्षा विभाग एवं स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर एंपावरिंग एंड ट्रांसफार्मिंग उत्तराखंड (सेतु) की ओर से दून विवि में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने कला, मानविकी और विज्ञान में कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का समावेश, कार्यान्वयन और उन्नति विषय पर विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि एवं एनसीवीईटी के पूर्व अध्यक्ष एनसी कलसी ने कहा कि कला, मानविकी और विज्ञान विषयों की परंपरागत पढ़ाई में कौशल के समावेश का अभाव है। रोजगार के लिए आवश्यक कौशल को परंपरागत शिक्षा व्यवस्था से जोड़े बिना देश का विकास संभव नहीं है। उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि प्रौद्योगिकी और तकनीक बढ़ने के साथ ही सरकारी और प्राइवेट क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। ऐसे में परंपरागत शिक्षा व्यवस्था से रोजगार की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि पारंपरिक विषयों के साथ बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल का विकास ही रोजगार प्रदान कर सकता है। कहा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य होने से यहां के विद्यार्थियों के समक्ष अलग चुनौतियां हैं, जिनका हल भी स्थानीय रूप से ही खोजना होगा।
कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि दून विवि में रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों के संचालन से प्लेसमेंट की दर बढ़ी है। सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने भी विचार रखे। कार्यशाला में डॉ. देवेंद्र भसीन, डॉ. दीपक कुमार पांडेय, ब्योमकेश दुबे, विजय कुमार यादव, डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, सी रविशंकर, कुलपति प्रो. एनके जोशी, डॉ. राम शर्मा मौजूद रहे।