उत्तरांखड के कर्मचारियों के वेतन पर बढ़ रहे खर्च से सरकार चिंतित नजर आ रही है। वेतन, पेंशन और ब्याज पर ही सरकार को करीब 13 हजार करोड़ रुपए वर्ष 2014-15 में खर्च करना है।
खर्च से चिंतित नजर आ रही सरकार
दीपावली से पहले कर्मचारियों को वेतन देने में भी सरकार को इसी कशमकश से गुजरना पड़ा। वित्त विभाग के मुताबिक इस पर करीब 1600 करोड़ रुपए का व्यय भार आने का अनुमान था। दूसरी ओर सरकार ने सात प्रतिशत डीए देने का भी फैसला किया है।
इससे भी वेतन के खर्च में इजाफा हो गया। ऐसे में बोनस देने और वेतन को बाद में देने का फैसला किया गया। छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने से राजकोष पर वेतन और पेंशन का खासा भार पड़ा था।
2012-13 में सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर करीब छह हजार करोड़ रुपए खर्च किए थे। 2013-14 में ही यह बढ़कर सात हजार करोड़ हो गया। अब आठ हजार करोड़ होने का अनुमान है।
यह भी अनुमान है कि 2017 में सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू होंगी। उस समय केवल वेतन पर ही खर्च दस हजार करोड़ रुपए से अधिक का हो जाएगा।
मुसीबत यह है कि राजस्व आय के हिसाब से यह खर्च पटरी पर नहीं आ रहा है। हालांकि पिछले दो साल में राजस्व बढ़ने से वेतन और राजस्व के अनुपात में कमी आई है पर अब इसके बढ़ जाने का भी अनुमान है। 2017 में यह अनुपात करीब 64 प्रतिशत हो सकता है।
मतलब यह कि सौ रुपए के राजस्व पर सरकार 64 पैसे वेतन पर खर्च कर रही होगी। जाहिर है कि अवस्थापना विकास और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को बेहद सीमित संसाधनों से काम चलाना होगा।