घटना के बाद शाम को एम्स के डिप्टी डायरेक्टर अंशुमान गुप्ता और जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल घटनास्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने आंदोलनकारियों को एम्स के डायरेक्टर प्रो. रविकांत से मुलाकात करने के लिए सिर्फ पांच लोगों को ही जाने को कहा। इस पर आंदोलनकारियों ने उन्हें यह कहकर साफ मना कर दिया कि एम्स के डायरेक्टर को यहां आना होगा।
वह कहीं नहीं जाएंगे। इसके बाद डिप्टी डायरेक्टर और पीआरओ वहां से जैसे ही जाने लगे तभी आंदोलनकारियों और भाजपा नेता ज्योति सजवाण, पार्षद राजेंद्र बिष्ट और कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला, जितेंद्र पाल पाठी आदि ने उन्हें पकड़ कर बंधक बना लिया। इस दौरान पीएससी जवानों और आंदोलनकारियों के बीच हाथापाई और गहमागहमी होने लगी।
मामला गंभीर होते देख कोतवाल रितेश शाह भी भीड़ में आ धमके। इस दौरान आंदोलनकारियों और कोतवाल के बीच भी नोकझोंक देखने को मिली। किसी तरह उन्होंने एम्स के डिप्टी डायरेक्टर अंशुमान गुप्ता और जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल को बाहर निकाला। इस दौरान कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला पुलिस के वाहन के पीछे भी दौड़े। पुलिस दोनों को सीओ आफिस ले जाने में सफल रही।
बहाली की मांग को लेकर टंकी पर चढ़ी कंचन और मनीषा ने तीन बार एम्स प्रशासन के नाम लेटर भिजवाया। पहले लेटर पुलिस के नाम करीब सवा सात बजे आया, जिसमें लिखा था कि अगर कोई भी टंकी पर चढ़कर उन्हें बचाने की कोशिश करेगा तो वह टंकी से कूद जाएंगी। इसकी जिम्मेदारी एम्स प्रशासन और डायरेक्टर प्रो. रविकांत की होगी। दूसरा पत्र सवा आठ बजे करीब आया। यह भी पुलिस के नाम ही था इसमें लिखा गया था कि पूर्व में एम्स के पांचवें मंजिल में बहाली की मांग को लेकर दाताराम ममगाईं चढ़े थे। उन्हें झूठा आश्वासन देकर नीचे उतारा गया था। अब वह झूठे आश्वासन पर नीचे नहीं आने वाली हैं। तीसरा लेटर करीब आठ बजकर 40 मिनट पर आया, जिसमें तहसीलदार रेखा आर्य को झूठा आश्वासन दिए जाने की बात लिखी हुई थी।
एम्स प्रशासन मुर्दाबाद के लगे नारे
आउटसोर्सिंग संघर्ष मोर्चा के दीपक रयाल ने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निकाले गए सभी कर्मचारियों को एम्स प्रशासन बहाल नहीं कर लेता। टंकी पर चढ़ी दो महिलाकर्मियों के समर्थन में टंकी की निचली सीढ़ियों पर राधा राणा, मोनिका, प्रतिभा, साधना, ममता, शिवानी, सरिता, पूजा, सुमन वर्मा, शोभा चौहान, लक्ष्मी नेगी, राजबाला, अनिता भंडारी, सरवेश्री, प्रतिभा बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने एम्स प्रशासन मुर्दाबाद, हमारी मांगे पूरी करो, आदि नारे जमकर लगाए।
आंदोलनकारियों ने बताया कि टंकी पर चढ़ी दोनों महिलाकर्मियों ने आदर्श नगर स्थित पानी की बड़ी टंकी पर चढ़ने का निर्णय लिया था। लेकिन वहां गेट पर ताला लगा होने के कारण वह टंकी पर नहीं चढ़ पाई। इसके बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन परिसर पर जीआरपी चौकी के समीप स्थित पानी की टंकी की ओर रुख किया। यहां कोई गेट और ताला न लगा होने के कारण वह आसानी से इस पर सुबह के करीब पांच बजे चढ़ गए।
धरने पर थी पत्नी, पति को भी निकाला
बीती 15 अप्रैल की सुबह साढ़े छह बजे एम्स के पांचवीं मंजिल पर 55 वर्षीय बुजुर्ग दाताराम ममगाईं हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़े थे। तभी नीचे शुक्रवार को पानी की टंकी पर चढ़ी मनीषा भी धरना दे रही थी। तभी एम्स ने लैब असिस्टेंट के पद पर तैनात उनके पति सतीश चंचल को भी निकाल दिया। तभी से पत्नी और पति दोनों ही बेरोजगार हो गए। इस बात से मनीषा बहुत ही परेशान चल रही थी।