छत से बुजुर्ग दाताराम को उतारने के बाद एम्स के अधीक्षण अभियंता पद स्थापना सुलेमान अहमद के साथ वार्ता कराई गई। इस दौरान तहसीलदार रेखा आर्य, कोतवाल रितेश शाह और एम्स के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। इस बीच इस बात को लेकर सहमति बनी कि निष्कासित 35 लोगों को बुधवार से आउटसोर्सिंग के तहत पुन: नियुक्ति दी जाएगी। फिलहाल अभी यह तय नहीं है कि 60 लोगों की स्थायी नियुक्ति तक अड़े अनशनकारी 35 लोगों की बहाली के बाद आंदोलन स्थगित करेंगे या नहीं।
कोतवाल की सूझबूझ से पकड़ में आए दाताराम
जब बुजुर्ग दाताराम एम्स की पांचवीं मंजिल से नहीं उतरे और ना ही किसी को अपने आसपास फटकने दिया। तभी कोतवाल रितेश शाह करीब डेढ़ बजे एम्स के पांचवे तल पर दबे पांव चढ़े। इसकी भनक दाताराम को भी नहीं लग पाई। इसी बीच कोतवाल रितेश शाह ने दाताराम को मौका पाकर दबोच लिया।
मुख्यमंत्री से मिलीं मेयर, अवगत कराया
निष्कासित कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर एम्स प्रशासन से वार्ता करने के बाद मेयर अनिता ममगाईं देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिली। इस दौरान उन्होंने पूरे घटनाक्रम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुलाकात के बाद मेयर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे एम्स निदेशक से खुद वार्ता करेंगे। हर संभव प्रयास किया जाएगा कि अनशन पर बैठे कर्मचारियों के साथ न्याय हो।
शांतिभंग में दाताराम का किया चालान
कानून को अपने हाथ में लेने और शांतिभंग करने के आरोप में कोतवाल रितेश शाह ने छत पर चढ़े दाताराम ममगाईं का चालान काटा है। कोतवाल ने बताया कि दाताराम को उप जिलाधिकारी प्रेमलाल के सामने पेश किया है।
एम्स के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने वालों की ओर से लगाए जा रहे तमाम आरोपों को एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत लोगों की मांगे तथ्यहीन व गलत हैं। आउटसोर्स कर्मचारी एम्स संस्थान से सिर्फ उत्तराखंड के लोगों को हटाए जाने की बात कह रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं। इनमें कई लोग गैर उत्तराखंड से भी हैं, जिनमें मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद और सहारनपुर के कर्मचारी शामिल हैं। एम्स केंद्रीय संस्थान है, इस लिहाज से इसमें 70 प्रतिशत आरक्षण उत्तराखंड मूल के लोगों के लिए नहीं हो सकता। लिहाजा इसके लिए पॉलिसी केंद्र सरकार ही बना सकती हैं।
एम्स प्रशासन का तर्क है कि संस्थान में वर्तमान समय के दौरान कार्यरत कर्मचारियों में स्थानीय कर्मचारी 70 प्रतिशत से अधिक हैं। एम्स प्रशासन किसी भी अनैतिक दबाव में आकर मन मुताबिक भर्ती नहीं कर सकता। भर्ती निर्धारित सीटों से अधिक नहीं हो सकती है। हटाए गए अस्थायी कर्मियों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को जो बुजुर्ग व्यक्ति संस्थान की छत पर चढ़े थे, वह एम्स में अपनी बेटियों की स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इनकी दोनों बेटियां एम्स की नियमित नर्सिंग पदों की परीक्षा में हर बार बैठीं हैं, लेकिन कभी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाईं। एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जितनी सीटों पर नियमित अभ्यर्थी ज्वाइन करेंगे, उतनी सीटों पर आउटसोर्स कर्मियों को हटाया जाएगा। जो कर्मचारी नर्सिंग व अटेंडेंट्स पदों से हटाए गए हैं वह पूर्णरूप से प्राइवेट कंपनी के अस्थायी कर्मचारी थे।